विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
तेहरान, ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Ali Khamenei के नाम से जारी एक कड़े संदेश में स्पष्ट किया गया है कि देश अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़ेगा। इस बयान को अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच एक सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
जारी संदेश में कहा गया कि ईरान अपनी सामरिक क्षमताओं को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है। इसमें यह भी दोहराया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई भी बाहरी दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ईरानी नेतृत्व ने साफ किया कि परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम देश की संप्रभुता और सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं। इन्हें छोड़ना या कमजोर करना ईरान के हितों के खिलाफ माना जाएगा।
संदेश में अमेरिका की नीतियों पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा गया कि दबाव बनाने की रणनीति से ईरान को झुकाया नहीं जा सकता। देश अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान से यह संकेत मिलता है कि ईरान आने वाले समय में भी अपनी रक्षा और तकनीकी क्षमताओं को प्राथमिकता देगा। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।
इस घटनाक्रम को अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
अब यह देखना अहम होगा कि इस कड़े रुख के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या इससे दोनों देशों के बीच संबंधों में और अधिक तनाव बढ़ता है।







