नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर मंगलवार को नीट पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। शाम के समय दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और कांग्रेस के कई सांसदों व कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
कुछ नेताओं को मंदिर मार्ग थाने, जबकि अन्य को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया। बाद में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी हिरासत में लिए गए नेताओं से मिलने मंदिर मार्ग थाने पहुंचीं।
इधर जंतर-मंतर पर भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने विपक्षी नेताओं के साथ सख्ती बरती। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दावा किया कि हिरासत में लेने के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही मांगों का सम्मान नहीं कर रही।
धरना स्थल पर प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन सरकार की ओर से कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने पहुंचे। जितेंद्र सिंह ने बाद में सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया कि राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया गया था, क्योंकि प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन से आम लोगों को असुविधा हो रही थी। उनके अनुसार राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए तैयार हो जाए तो वे धरना समाप्त कर देंगे।
जितेंद्र सिंह ने अपने बयान में कहा कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व से सहमति मिलने के बाद राहुल गांधी को संसद में चर्चा कराने का आश्वासन दे दिया गया, लेकिन इसके बाद उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नई मांग जोड़ दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी पहले की शर्त से पीछे हट गए और बातचीत के दौरान सरकार के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। जितेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने अब तक इस मुद्दे पर संसद में औपचारिक चर्चा के लिए नियमों के तहत कोई नोटिस भी नहीं दिया है।
केंद्रीय मंत्री के इन आरोपों पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि यह तय करने का अधिकार सरकार या उसके मंत्रियों को नहीं है कि विपक्ष किन मुद्दों को उठाएगा या देश के छात्र क्या मांग करेंगे। उन्होंने सोमवार को सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को छात्रों से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए और उनकी चिंताओं का समाधान करना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पहली बार नीट पेपर लीक मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई। हालांकि यह बयान सीधे प्रधानमंत्री ने नहीं दिया, बल्कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के माध्यम से सार्वजनिक किया गया। दूसरी ओर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित ज्यादती के खिलाफ जवाब मांगने के लिए कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास तक मार्च कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर न तो जवाबदेही तय करना चाहती है और न ही संसद में चर्चा कराने को तैयार है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि पार्टी छात्रों के हित में उनके साथ खड़ी है और सरकार को बल प्रयोग तथा लाठीचार्ज के लिए जवाब देना होगा। प्रदर्शन के दौरान पंजाब कांग्रेस के नेता चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा को भी हिरासत में लिया गया, जबकि धरने पर बैठे राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने विरोध दर्ज कराने के लिए खुद को रस्सी से बांध लिया।






