स्टेट डेस्क, रानी कुमारी।
पूर्णिया। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) की दारोगा भर्ती प्रारंभिक परीक्षा में पूर्णिया के एक परीक्षा केंद्र पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में परीक्षा के दौरान नकल, सॉल्वर गैंग से संपर्क और परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों की मिलीभगत के मामले सामने आया हैं। मामला 18 जनवरी 2026 को पूर्णिया सिटी स्थित आरपीसी हाई स्कूल केंद्र-2 पर आयोजित परीक्षा से जुड़ा है। जांच के आधार पर दोनों आरोपी अभ्यर्थियों का परिणाम रद्द करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
स्मार्टफोन से प्रश्नपत्र की तस्वीर भेजने का आरोप
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, पहली पाली की परीक्षा सुबह 10 बजे शुरू हुई थी। आरोपी अभ्यर्थी रूपेश कुमार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और जैमर लगे होने के बावजूद स्मार्टफोन लेकर परीक्षा कक्ष में प्रवेश कर गया। सुबह 10:05 बजे उसने प्रश्नपत्र की बुकलेट संख्या 51212241 की तस्वीर खींचकर बाहर मौजूद सॉल्वर गैंग को भेज दी। इसके बाद गैंग ने 59 मिनट के भीतर सभी 100 सवालों के जवाब तैयार कर लिए और सुबह 11:04 बजे परीक्षा कक्ष में तैनात वीक्षक ने रूपेश कुमार को उत्तरों की पर्ची सौंपी।
दूसरी पाली में भी नकल का आरोप
जांच में दूसरी पाली की परीक्षा में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई। आरोप है कि अभ्यर्थी नरेश कुमार ने प्रश्नपुस्तिका संख्या 52212038 की तस्वीर बाहर भेजी और सॉल्वर गैंग से उत्तर प्राप्त किए। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर इसी तरीके से प्रारंभिक परीक्षा पास की थी। रूपेश कुमार के मुख्य परीक्षा में सफल भी हो गया था।
नियमों की अनदेखी और ड्यूटी चार्ट में गड़बड़ी
जांच के दौरान परीक्षा केंद्र की व्यवस्था में भी कई अनियमितताएं पाई गईं। आयोग के नियमों के अनुसार, एक कमरे में अधिकतम 24 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन रूपेश कुमार के कमरे में 36 अभ्यर्थियों को बैठाया गया था। इसके अलावा, ड्यूटी चार्ट में कथित फर्जी हस्ताक्षर और वीक्षकों की तैनाती में गंभीर गड़बड़ियां भी सामने आईं।
जांच में केंद्राधीक्षक मोहम्मद मुजफ्फर आलम और कार्यालय कर्मी विवेक कुमार की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीटिंग प्लान में बदलाव और गलत रिपोर्ट तैयार करने से संबंधित अनियमितताओं की भी जांच की गई है।
ईओयू ने दर्ज किया मामला, एसआईटी ने भेजी रिपोर्ट
मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने केंद्राधीक्षक, कार्यालय कर्मी, वीक्षकों और संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर आयोग को भेज दी है। इसमें दोनों अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम रद्द करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।







