लोकल डेस्क, एन के सिंह।
पंचायत रोजगार सेवक के वेतन में कटौती और मेट को पदमुक्त करने का आदेश। सिसहनी ग्राम में तालाब जीर्णोद्धार के दौरान मजदूरों के पुराने फोटोग्राफ का बार-बार इस्तेमाल कर गलत तरीके से हाजिरी बनाने का मामला उजागर हुआ।
पूर्वी चंपारण: केन्द्रीय लोक शिकायत निवारण प्रणाली पोर्टल पर दर्ज शिकायत की जाँच के बाद पूर्वी चम्पारण जिले में मनरेगा योजनाओं में चल रही अनियमितता के विरुद्ध एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। पकड़ीदयाल प्रखंड के सिसहनी ग्राम निवासी मोहन मुखिया द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर जिला स्तरीय पदाधिकारी से कराई गई जाँच में भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही के गंभीर मामले सामने आए हैं। जाँच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि ग्राम पंचायत अजगरवा सिसहनी में तालाब जीर्णोद्धार की योजना में बड़े पैमाने पर तकनीकी हेरफेर किया गया था।
जाँच के दौरान पाया गया कि योजना संख्या 0513017003/WC/20759036 के तहत वार्ड नंबर 09 में नए तालाब के जीर्णोद्धार कार्य में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए उपयोग होने वाले NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप के साथ छेड़छाड़ की गई थी। जाँच पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि कई मस्टर रॉल में एक ही मजदूर के पुराने फोटोग्राफ का बार-बार उपयोग किया गया, जो विभागीय मार्गदर्शिका का सीधा उल्लंघन है। यह कृत्य न केवल कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की मंशा को भी उजागर करता है।
इस मामले में पंचायत रोजगार सेवक की भूमिका अत्यंत संदेहास्पद और लापरवाह पाई गई है। नियमतः पंचायत रोजगार सेवक की यह जिम्मेदारी होती है कि मेट द्वारा ऐप पर अपलोड की गई हाजिरी और फोटोग्राफ का बारीकी से सत्यापन करें। जाँच के बाद दोषी पाए गए पंचायत रोजगार सेवक हिमांशु शेखर से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उनके द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। प्रशासन ने माना कि इस महत्वपूर्ण कार्य में बरती गई लापरवाही मेट और पंचायत रोजगार सेवक की मिलीभगत और गलत मंशा को दर्शाती है।
विभागीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने के बाद, उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। विभागीय पत्रांक-196 के आलोक में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पंचायत रोजगार सेवक हिमांशु शेखर के मूल मानदेय में एक वर्ष की अवधि के लिए 5 प्रतिशत की कटौती का दंड अधिरोपित किया गया है। साथ ही, जिला प्रशासन ने उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण को पूरी तरह अस्वीकृत कर दिया है।
इसके अतिरिक्त, इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल संबंधित मेट के विरुद्ध भी सख्त कदम उठाया गया है। उप विकास आयुक्त ने पकड़ीदयाल के कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा) को तत्काल प्रभाव से उक्त मेट को हटाने का निर्देश दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उसके स्थान पर अब जीविका के माध्यम से नए मेट का चयन कर कार्य सुचारू रूप से कराया जाए। जिलाधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक की सहमति के बाद की गई इस कार्रवाई से जिले के अन्य कर्मियों और बिचौलियों के बीच हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।







