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पोषण के मुद्दे पर सरकार को खरगे ने घेरा

नेशनल डेस्क, मुस्कान सिंह ।

नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार पोषण संबंधी चुनौतियों से निपटने में विफल रही है और महत्वपूर्ण आंकड़ों को सार्वजनिक करने में पारदर्शिता नहीं बरत रही है।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में खरगे ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रत्येक पांच में से एक बच्चा तीव्र कुपोषण का शिकार है,8 जबकि एक-तिहाई बच्चे कम वजन की समस्या से प्रभावित हैं। इसके अलावा छह से 23 माह आयु वर्ग के अधिकांश बच्चों को पर्याप्त और संतुलित पोषण नहीं मिल पा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की बड़ी संख्या में महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जो देश में पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को दर्शाता है। उनके अनुसार महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य किसी भी देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार होता है, इसलिए इस दिशा में अधिक गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है।

खरगे ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) से जुड़े आंकड़े सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों की वास्तविक स्थिति को सामने लाते हैं। उनका कहना है कि इन आंकड़ों से कई गंभीर चुनौतियां उजागर होती हैं, जिन पर सरकार पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर चुनिंदा आंकड़ों को दबाने और वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया। खरगे ने कहा कि देश के कमजोर और वंचित वर्गों की स्थिति में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है, जबकि सरकार प्रचार पर अधिक ध्यान दे रही है।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में इस बयान को स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक कल्याण के मुद्दों पर केंद्र और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक बहस के रूप में देखा जा रहा है।

देश में महिलाओं और बच्चों के पोषण की स्थिति लंबे समय से सार्वजनिक नीति का महत्वपूर्ण विषय रही है। ऐसे में एनएफएचएस के आंकड़ों को लेकर उठी यह बहस आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बन सकती है।