विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लाईदुबई की घटना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान के को-पायलट का ईरान के साथ संबंध हो सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्हें मिली जानकारी के आधार पर वह घटना में ईरान की संभावित भूमिका से इनकार नहीं कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच और जानकारी जुटाने का काम अभी जारी है।
ट्रंप ने ईरान को लेकर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब तेहरान के सामने एक फैसला लेने की स्थिति है। उनके मुताबिक, ईरान को अमेरिका के साथ एक बेहद निष्पक्ष समझौता करना होगा, अन्यथा उसके अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इससे पहले ईरान की ओर से तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन ट्रंप ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
फ्लाईदुबई की उड़ान में कथित तौर पर को-पायलट द्वारा भारतीय कैप्टन पर हमला किए जाने की घटना को लेकर ट्रंप से ईरान की भूमिका के बारे में सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर वह ईरान के साथ संभावित संबंध की संभावना को खारिज नहीं कर रहे हैं। हालांकि, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस मामले में ईरान की भूमिका को लेकर जल्द निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कही है। उनका कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि घटना में ईरान का हाथ था।
फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान ओमान के रहने वाले को-पायलट पर भारतीय कैप्टन पर हमला करने का आरोप लगा। घटना के बाद विमान तेजी से नीचे आने लगा, जिससे विमान में आपात स्थिति पैदा हो गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, विमान करीब 33 हजार फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे आया और लगभग 17 हजार फीट तक पहुंच गया।
घटना के दौरान भारतीय कैप्टन घायल हो गए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों ने कॉकपिट के अंदर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में मदद की। हालात संभाले जाने के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। इस पूरी घटना के दौरान पायलट, चालक दल और यात्रियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
इस घटना के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ईरान की ओर से कतर के माध्यम से अमेरिका तक एक प्रस्ताव पहुंचाए जाने की बात सामने आई थी। इसमें युद्ध रोकने, नाकेबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने जैसी शर्तें शामिल थीं। हालांकि, ट्रंप ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के साथ नए समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपनी शर्तों पर जोर दे रहा है। वहीं, तेहरान भी बातचीत को लेकर अपनी शर्तें सामने रख रहा है। फ्लाईदुबई की घटना में ईरान की संभावित भूमिका की जांच और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर बनी हुई है।







