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बंगाल में भाजपा की जीत के बाद भी ‘पुशबैक’ की आशंका नहीं: बांग्लादेश

विदेश डेस्क, ऋषि राज

ढाका: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद बांग्लादेश ने स्पष्ट किया है कि उसे अपने नागरिकों के “पुशबैक” यानी जबरन वापस भेजे जाने की फिलहाल कोई आशंका नहीं दिख रही है। हालांकि, सीमा सुरक्षा को लेकर बांग्लादेश सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है और सीमा सुरक्षा बलों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बावजूद फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं दिख रही है, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों को वापस भेजे जाने की आशंका हो। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

ढाका में आयोजित जिलाधिकारियों के सम्मेलन के दौरान गृह मंत्री ने कहा कि बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) को सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच हालात सामान्य बने रहेंगे।

गौरतलब है कि “पुशबैक” का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के बीच पहले भी कई बार चर्चा का विषय बन चुका है। बांग्लादेश की ओर से समय-समय पर यह चिंता जताई जाती रही है कि अवैध प्रवासियों को सीमा पार भेजने की कोशिश की जा सकती है। 

हालांकि भारत की ओर से हमेशा कानूनी और मानवीय प्रक्रियाओं के पालन की बात कही जाती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति का असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, भाषाई और आर्थिक संबंध काफी गहरे हैं। ऐसे में राजनीतिक बदलावों को लेकर ढाका की सतर्कता भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। भाजपा कई बार इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ चुकी है। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है।

फिलहाल बांग्लादेश सरकार ने स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सहयोग जारी रहेगा।