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बायोफार्मा विनिर्माण में भारत की बड़ी छलांग, 10 हजार करोड़ का प्लान

नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक व सुलभ बनाने के लिए बजट 2026-27 में कई बड़े प्रावधानों की घोषणा की है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट पेश करते हुए “बायोफार्मा शक्ति” कार्यक्रम शुरू करने का ऐलान किया, जिसके तहत अगले पांच वर्षों के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य घरेलू स्तर पर जैविक घटकों, उत्पादों और जैविक दवाओं के उत्पादन के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है, ताकि आयात पर निर्भरता घटे और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भूमिका निभा सके।

सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार और कौशल विकास पर भी जोर दिया है। संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (AHP) के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों में नए संस्थान स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों में ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, प्रायोगिक मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य सहित 10 प्रमुख चिकित्सीय विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में एक लाख एएचपी को जोड़ा जाए।

बुजुर्गों और विशेष देखभाल सेवाओं के लिए भी एक सशक्त केयर इकोसिस्टम विकसित करने की योजना है। कल्याण, देखभाल, योग, चिकित्सा और सहायक उपकरणों के उपयोग से जुड़े एनएसक्यूएफ-संरेखित कार्यक्रमों के माध्यम से बहु-कौशल सेवा प्रदाताओं को तैयार किया जाएगा। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में लगभग डेढ़ लाख देखभाल सेवा प्रदाता प्रशिक्षित होंगे।

चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों की मदद से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। ये केंद्र चिकित्सा, शिक्षा और शोध सुविधाओं को एकीकृत रूप में उपलब्ध कराएंगे। यहां आयुष केंद्र, चिकित्सा पर्यटन सुविधा, जांच, उपचार के बाद देखभाल और नशा मुक्ति केंद्र भी विकसित किए जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी फोकस रखा गया है। उत्तर भारत में राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं की कमी को देखते हुए केंद्रीय बजट में निमहांस-2 की स्थापना का प्रस्ताव है। साथ ही रांची और तेजपुर को क्षेत्रीय स्वास्थ्य हब के रूप में विकसित कर राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक बनाने की योजना बनाई गई है। इन पहलों से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को व्यापक मजबूती मिलने की उम्मीद है।