विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद उनका प्रस्तावित नेपाल दौरा टल गया है। विक्रम मिस्री नेपाल जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बालेन शाह को भारत यात्रा का औपचारिक निमंत्रण देने वाले थे। इससे पहले शाह ने अमेरिका के दूत सर्जियो गोर से मिलने से भी इनकार किया था, जिसके बाद नेपाल में उनकी विदेश नीति और कूटनीतिक रवैये को लेकर बहस तेज हो गई है।
भारतीय विदेश सचिव का दौरा टला
नेपाल के एक प्रमुख अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा कि प्रधानमंत्री बालेन शाह की विदेशी अधिकारियों से मुलाकात न करने की नीति में अधिक संतुलन और व्यवहारिकता की जरूरत है। अखबार ने लिखा कि हर विदेशी प्रतिनिधि से मिलना जरूरी नहीं होता, लेकिन लगातार मुलाकात से इनकार करना भी उचित कूटनीतिक संदेश नहीं देता। रिपोर्टों के अनुसार, जब यह स्पष्ट हो गया कि बालेन शाह विक्रम मिस्री से मुलाकात नहीं करेंगे, तब उनकी दो दिवसीय नेपाल यात्रा स्थगित कर दी गई।
बालेन शाह के इनकार की वजह क्या है?
नेपाल के कई मीडिया संस्थानों का कहना है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह की यह नीति विदेशी अधिकारियों, विशेषकर मंत्री स्तर से नीचे के प्रतिनिधियों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात से बचने की रणनीति का हिस्सा है। माना जा रहा है कि शाह बराबरी के स्तर पर कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता देना चाहते हैं। इसी कारण उन्होंने कई विदेशी प्रतिनिधियों से मुलाकात नहीं की।
भारत-नेपाल सीमा विवाद के कारण नहीं मिले बालेन शाह?
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख सीमा विवाद भी इस फैसले की एक बड़ी वजह हो सकता है। नेपाल ने हाल ही में भारत-चीन के कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग को लिपुलेख दर्रे से होकर संचालित किए जाने पर आपत्ति जताई थी। नेपाल का दावा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्र 1816 की सुगौली संधि के अनुसार उसके हिस्से में आते हैं, जबकि भारत इन क्षेत्रों को उत्तराखंड का हिस्सा मानता है और लंबे समय से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करता रहा है।
बराबरी के नेताओं से मिलना चाहते हैं बालेन शाह
ऑनलाइन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बालेन Shah ‘समान स्तर की कूटनीति’ की नीति पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि विदेश नीति में केवल समान पद और स्तर के नेताओं के साथ ही औपचारिक बातचीत की जानी चाहिए। ‘द काठमांडू पोस्ट’ ने भी लिखा कि विक्रम मिस्री की नेपाल यात्रा रद्द होने के पीछे प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मुलाकात को लेकर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलना मुख्य कारण रहा।
नेपाल के शीर्ष नेताओं की भी नहीं सुन रहे बालेन शाह
रिपोर्टों में कहा गया है कि नेपाल सरकार के कुछ वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने प्रधानमंत्री को अपना फैसला बदलने की सलाह दी थी। कैबिनेट के कुछ सदस्यों, जिनमें स्वर्णिम वागले और शिशिर खनाल का नाम भी शामिल है, ने कूटनीतिक दृष्टि से मुलाकात को जरूरी बताया था। इसके बावजूद बालेन शाह अपने फैसले पर कायम रहे। बताया गया कि भारत यात्रा की प्रारंभिक तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं, लेकिन बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने संकेत दिया कि शाह अगले एक वर्ष तक किसी भी विदेशी दौरे पर नहीं जाएंगे।
बालेन शाह ने सर्जियो गोर से मिलने से किया था इनकार
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बालेन शाह ने अमेरिका के दूत सर्जियो गोर से मिलने से भी इनकार कर दिया था। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह जरूर कहा कि उनका कार्यक्रम अत्यधिक व्यस्त था। गोर ने बाद में नेपाल के विदेश मंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात की। काठमांडू के राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह एक नई कूटनीतिक परंपरा स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह के फैसलों से भारत और अमेरिका जैसे प्रमुख साझेदार देशों के साथ नेपाल के रिश्तों पर असर पड़ सकता है।







