Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

बाल सुरक्षा की दिशा में बेहतरीन रहा वर्ष 2025

स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना |

वैशाली, सिवान और बक्सर में 849 बच्चों को मिला नया जीवन...

मुजफ्फरपुर: बाल सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में वर्ष 2025 वैशाली, सिवान एवं बक्सर जिलों के लिए एक ऐतिहासिक और उपलब्धिपूर्ण वर्ष साबित हुआ है। जिला प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सामुदायिक नेतृत्व के साथ समन्वय स्थापित करते हुए स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान ने 849 बच्चों को बाल विवाह, बाल तस्करी एवं बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं से मुक्त कराया।

संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 849 बच्चों में से 751 बच्चों को बाल विवाह से बचाया गया, जबकि 98 बच्चों को ट्रैफिकिंग गिरोहों एवं बाल श्रम के चंगुल से मुक्त कराया गया। ट्रैफिकिंग और बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों में 23 लड़कियां एवं 75 लड़के शामिल हैं।

स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान, देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत सबसे बड़े नागरिक समाज नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। जेआरसी के देशभर में 250 से अधिक सहयोगी संगठन 451 जिलों में बाल अधिकारों की रक्षा और बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

जेआरसी नेटवर्क द्वारा 1 जनवरी 2025 से अब तक पूरे देश में 1,98,628 बाल विवाह रोके गए हैं। इसके साथ ही 55,146 बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया, जिनमें 40,830 लड़के और 14,316 लड़कियां शामिल हैं। इस दौरान बच्चों की तस्करी से जुड़े 42,217 मामले भी दर्ज कराए गए हैं।

इन उपलब्धियों पर संस्थान के सचिव डॉ. सुधीर कुमार शुक्ला ने कहा, “बाल सुरक्षा की दिशा में यह वर्ष ऐतिहासिक रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, ग्राम पंचायतों और शिक्षकों के सहयोग से जमीन पर जो प्रयास किए गए, उनके सकारात्मक परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं। बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराना पहला कदम है, लेकिन गरीबी, बाल मजदूरी और बाल विवाह के दुष्चक्र को तोड़ने के लिए पुनर्वास, शिक्षा से जोड़ना और परिवारों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना बेहद जरूरी है।”

संस्थान जेआरसी नेटवर्क के साथ मिलकर वर्ष 2030 तक भारत से बाल विवाह के पूर्ण उन्मूलन, बाल मजदूरी की समाप्ति और बच्चों की तस्करी रोकने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रहा है। इस अभियान में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) सहित सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है।

बाल विवाह की रोकथाम में धार्मिक नेतृत्व की भूमिका को अहम मानते हुए देशभर के तीन लाख से अधिक धार्मिक नेताओं को इस अभियान से जोड़ा गया है। कई धार्मिक स्थलों पर स्पष्ट बोर्ड लगाए गए हैं कि वहां बाल विवाह की अनुमति नहीं है।

वहीं ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत केंद्र सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान में स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर टेंट संचालकों, बैंड वालों, दर्जियों, कैटरर्स और सजावट से जुड़े लोगों के साथ बैठकें कर उन्हें जागरूक किया कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार का सहयोग कानूनन अपराध है।

इन समन्वित प्रयासों से जिले में बाल सुरक्षा को लेकर एक मजबूत सामाजिक संदेश गया है, जो आने वाले वर्षों में और सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाता है।