नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने 'ऑपरेशन वज्र' के तहत बिहार में नकली और अवैध दवाओं के अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान गया में कई अवैध गोदाम और पटना के मसौढ़ी में एक गैरकानूनी दवा निर्माण इकाई पकड़ी गई। इस मामले में गिरोह के सरगना को भी गिरफ्तार किया गया है।
गया में गोदामों पर छापा, बड़ी खेप बरामद
सीबीएन की मध्य प्रदेश (नीमच) इकाई ने बताया कि अभियान के दौरान गया में पहले चार अवैध गोदामों पर छापा मारा गया। यहां से 68,200 ट्रामाडोल टैबलेट, 59,000 अन्य टैबलेट और कोडीन सिरप की 52,542 बोतलें बरामद की गईं।
जांच आगे बढ़ने पर शहर के अलग-अलग हिस्सों में छह और बिना पंजीकरण वाले गोदामों का पता चला। इन ठिकानों से भी बड़ी मात्रा में नकली और बिना अनुमति के रखी गई दवाएं बरामद की गईं।
22 जुलाई को सरगना गिरफ्तार
सीबीएन की टीम ने 16 से 27 जुलाई के बीच बिहार में लगातार निगरानी और छापेमारी की। इसी दौरान 22 जुलाई को मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर दो और अवैध गोदामों पर छापा मारा गया। यहां से 21,373 ब्यूप्रेनोर्फिन इंजेक्शन एम्प्यूल बरामद किए गए। तलाशी में क्लैवम-625, पैन-40, बेटाडीन ऑइंटमेंट, एजिथ्रल समेत कई नकली और मिलावटी दवाएं भी मिलीं।
राज्य औषधि विभाग ने भी की कार्रवाई
सीबीएन की सूचना पर बिहार राज्य औषधि प्रशासन ने भी कार्रवाई की। इस दौरान 4,39,774 टैबलेट और कैप्सूल, 1,895 इंजेक्शन, वायल और एम्प्यूल, 3,811 सिरप की बोतलें तथा 3,490 अन्य दवा उत्पाद (लोशन, ट्यूब, ड्रॉप्स आदि) जब्त किए गए।
जब्त दवाओं और सील किए गए गोदामों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए राज्य औषधि प्रशासन को सौंप दिया गया।
मसौढ़ी के फार्महाउस में चल रही थी अवैध फैक्ट्री
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का एक सदस्य पटना के मसौढ़ी के पास एक फार्महाउस में अवैध दवा निर्माण इकाई चला रहा था।
इसके बाद सीबीएन ने स्थानीय पुलिस, राज्य औषधि विभाग और खाद्य विभाग के साथ संयुक्त छापेमारी की। वहां से दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, उपकरण, रसायन और कृत्रिम फ्लेवरिंग एजेंट बरामद किए गए। पूरी अवैध निर्माण इकाई को बंद कर एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत मशीनें और अन्य सामान जब्त कर लिया गया।
ऐसे काम करता था गिरोह
जांच में पता चला कि आरोपी कम आय वाले इलाकों में बिना किराया समझौते के जगह किराये पर लेते थे। डिजिटल रिकॉर्ड से बचने के लिए किराया नकद में दिया जाता था। वहीं, पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल किया जाता था।
इस साल 90 मामले, 121 आरोपी गिरफ्तार
सीबीएन के अनुसार, इस कैलेंडर वर्ष में उसकी मध्य प्रदेश इकाई अब तक 90 मामले दर्ज कर चुकी है। इस दौरान तीन अवैध लैब का भंडाफोड़ किया गया और 121 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।






