स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।
पटना: बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नामांकन की प्रक्रिया को एकरूप बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। नए शैक्षणिक सत्र से राज्यभर के विश्वविद्यालयों में पीएचडी प्रवेश के लिए अब एक ही साझा प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे स्वीकृति के लिए राज्यपाल सह कुलाधिपति कार्यालय को भेजने की तैयारी है।
इस निर्णय के लागू होने के बाद शोधार्थियों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्री-पीएचडी टेस्ट देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ही परीक्षा के माध्यम से विषयवार सीटों की उपलब्धता और आरक्षण रोस्टर के अनुसार पीएचडी में नामांकन किया जाएगा। बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद ने वर्ष 2023 में ही इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया था, जिसे अब अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक की पात्रता के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) की तर्ज पर बिहार एलिजिबिलिटी टेस्ट (BET) शुरू करने की भी तैयारी है। इससे संबंधित प्रस्ताव पर भी जल्द स्वीकृति ली जाएगी।
इसके साथ ही विभाग ने चार वर्षीय बीए, बीएससी और बीएड एकीकृत पाठ्यक्रम की संरचना तैयार करने, बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के प्रतीक चिह्न, नियमावली और वार्षिक प्रतिवेदन को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई है।
राज्य सरकार मुख्यमंत्री स्कॉलरशिप योजना के तहत हर साल 100 छात्र-छात्राओं को विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति देने की योजना को भी अंतिम रूप दे रही है। वहीं, पीएचडी शोधार्थियों के लिए आर्यभट्ट बिहार रिसर्च प्रोजेक्ट स्कीम के अंतर्गत मुख्यमंत्री पीएचडी फेलोशिप योजना की कार्ययोजना तैयार करने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषयों पर शोध को बढ़ावा मिल सके।







