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बिहार: शराबबंदी के बाद सस्ते नशे की चपेट में युवा

स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।

शराबबंदी के बाद सस्ते नशे की चपेट में बिहार के युवा, मेंटल हेल्थ पर गंभीर खतरा

अररिया: बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद नशे की प्रवृत्ति खत्म होने के बजाय उसका स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। सीमावर्ती इलाकों में किशोर और युवा अब सस्ते व खतरनाक नशों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। खासकर ‘सनफिक्स’ जैसे औद्योगिक उत्पाद का नशे के रूप में इस्तेमाल युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है।

क्षेत्र में नशे की गिरफ्त में आते युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। शराब के अलावा स्मैक, ब्राउन शुगर, गांजा, अफीम और चरस जैसे नशों के साथ अब सनफिक्स का चलन भी तेजी से बढ़ा है। जानकारों के अनुसार, इस तरह के नशे से युवाओं की सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो रही है और मानसिक संतुलन बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं।

शराबबंदी के बावजूद सीमावर्ती इलाकों में नशे का जाल गहराता जा रहा है। किराना, हार्डवेयर, मोबाइल और चाय-पान की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध सनफिक्स महज 10 से 15 रुपये में मिल जाता है। बच्चे और युवा प्लास्टिक की थैली में इसे डालकर सांस के जरिए नशा लेते हैं, जिससे कुछ ही समय में उन्हें तीव्र नशा महसूस होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सनफिक्स कोई सेवन योग्य पदार्थ नहीं है, इसके बावजूद इसका नशे के रूप में इस्तेमाल मस्तिष्क पर गहरा और स्थायी प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय तक इसके सेवन से मानसिक और शारीरिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बढ़ती लत पर चिंता जताते हुए प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि जिस तरह शराब पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसी तरह सनफिक्स जैसे पदार्थों की बिक्री पर भी रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को इस घातक लत से बचाया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग भी इस खतरे को लेकर सतर्क है। नरपतगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार के अनुसार, इस तरह के नशे का सेवन मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और पागलपन जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर नजर रखें और उन्हें सही दिशा में शिक्षित करें, ताकि वे नशे की गिरफ्त में न आएं।

बदलते नशे के इस खतरनाक ट्रेंड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शराबबंदी के साथ-साथ सस्ते और वैकल्पिक नशों पर नियंत्रण के लिए भी ठोस नीति की जरूरत है।