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ब्रिक्स देशों के खिलाफ ‘भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों’ का विरोध करते हैं रूस और चीन : पुतिन

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार को कहा कि रूस और चीन ने ब्रिक्स सदस्य देशों के खिलाफ लगाए जा रहे ‘भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों’ का कड़ा विरोध किया है। पुतिन ने साफ कहा कि ये प्रतिबंध न केवल सदस्य देशों के सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा डालते हैं बल्कि वैश्विक व्यापार और वित्तीय स्थिरता पर भी गंभीर असर डालते हैं।

साझा रुख अपनाने पर जोर

तियानजिन में आयोजित एक उच्च-स्तरीय सम्मेलन में पुतिन ने कहा कि रूस और चीन दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि ब्रिक्स देशों के खिलाफ लगाए जाने वाले किसी भी एकतरफा आर्थिक प्रतिबंध को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि इन कदमों का उद्देश्य ब्रिक्स जैसी उभरती शक्तियों को कमजोर करना है।

पुतिन ने यह भी कहा कि रूस और चीन ने मिलकर एक साझा रुख अपनाया है और अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाया जाएगा। उनके अनुसार, ब्रिक्स का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज को बुलंद करना और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करना है।

चीन का समर्थन

चीन के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर कहा कि किसी भी प्रकार के भेदभावपूर्ण प्रतिबंध न्यायसंगत प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत के खिलाफ हैं। चीन ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को राजनीति से प्रभावित नहीं होना चाहिए और सभी देशों को समान अवसर मिलने चाहिए।

चीनी अधिकारियों का मानना है कि प्रतिबंधों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में नहीं होना चाहिए। चीन ने अपील की कि वैश्विक व्यापार संगठन और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों को इस प्रकार के एकतरफा प्रतिबंधों पर अंकुश लगाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

ब्रिक्स देशों की चिंता

ब्रिक्स समूह (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) दुनिया की 40% से अधिक आबादी और लगभग 25% वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है। इसके बावजूद सदस्य देशों को अक्सर पश्चिमी देशों के आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन का यह संयुक्त बयान, पश्चिमी देशों को एक कड़ा संदेश है कि ब्रिक्स अब केवल एक आर्थिक मंच नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और रणनीतिक गठबंधन के रूप में भी उभर रहा है।

भविष्य की दिशा

पुतिन ने कहा कि रूस और चीन मिलकर ब्रिक्स के भीतर एक वैकल्पिक वित्तीय प्रणाली पर काम कर रहे हैं, ताकि पश्चिमी देशों की मौजूदा व्यवस्था पर निर्भरता कम की जा सके। इसके तहत नई भुगतान प्रणालियों और मुद्रा सहयोग की पहल तेज की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से ब्रिक्स देशों को अधिक मजबूती मिलेगी और बाहरी दबाव का असर कम होगा।

रूस और चीन का यह संयुक्त रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में ब्रिक्स अधिक आक्रामक तरीके से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगा। दोनों देशों का मानना है कि भेदभावपूर्ण प्रतिबंध केवल अविश्वास और अस्थिरता को जन्म देते हैं, जबकि विश्व को आज सहयोग, समानता और साझा विकास की आवश्यकता है।