विदेश डेस्क, ऋषि राज |
वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी व्यापारिक डील आखिरकार तय हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का बड़ा ऐलान किया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई लगभग 30 मिनट की फोन बातचीत के बाद सामने आया है। दोनों नेताओं के बीच इस बातचीत को भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया मोड़ माना जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर पोस्ट कर इस समझौते की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुले तौर पर प्रशंसा करते हुए उन्हें अपना “दोस्त” बताया और कहा कि मित्रता और आपसी सम्मान के चलते भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर तत्काल सहमति बनी है। ट्रंप ने कहा कि अब भारत से आने वाले उत्पादों पर पहले की तरह 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि केवल 18 प्रतिशत टैरिफ लगेगा।
दरअसल, अमेरिका ने पिछले वर्ष भारत पर कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया था। पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लागू था, जिसे रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया था। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों पर भारी दबाव पड़ा था। अब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि नए समझौते के तहत भारत पर कुल टैरिफ 18 प्रतिशत ही रहेगा, जिससे व्यापार को बड़ी राहत मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत बेहद सकारात्मक रही। पीएम मोदी ने कहा कि “मेड इन इंडिया” उत्पादों पर टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होना 1.4 अरब भारतीयों के लिए खुशी की खबर है और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जब दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र और प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं साथ मिलकर काम करती हैं, तो वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के नए अवसर पैदा होते हैं।
इस डील के पीछे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। पद संभालने के बाद से ही उन्होंने संकेत दिए थे कि भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद सुलझाया जाएगा। उनका मानना रहा है कि सच्चे दोस्त मतभेदों के बावजूद समाधान निकाल ही लेते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, टैरिफ में कटौती से भारत के निर्यात, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और फार्मा सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। साथ ही यह समझौता भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।







