विदेश डेस्क, मुस्कान कुमारी।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता अंतिम चरण में, इस महीने अंतिम रूप ले सकता है, अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच भारत की सबसे बड़ी डील, कार्बन लेवी और ऑटो पर जटिलताएं बाकी...
नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की बातचीत अंतिम दौर में पहुंच गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि दोनों पक्ष "बहुत करीब" हैं और इस महीने, खासकर 27 जनवरी को होने वाले भारत-ईयू शिखर सम्मेलन से पहले इसे अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी व्यापार डील होगी, जिससे 1.4 अरब की विशाल उपभोक्ता बाजार यूरोपीय सामानों के लिए खुल जाएगा।
मुख्य बिंदु और प्रगति
दोनों पक्षों ने 24 अध्यायों में से 20 को पूरी तरह अंतिम रूप दे दिया है। बचे हुए मुद्दों पर रोजाना वर्चुअल बातचीत जारी है। समझौता 2022 में फिर शुरू हुई बातचीत का नतीजा है, जो 2007 से चल रही थी लेकिन कई सालों तक रुकी रही। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत कई देशों पर टैरिफ बढ़ाने के बाद गति आई है। ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जहां 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 120 अरब यूरो (लगभग 140 अरब डॉलर) रहा।
ईयू आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 25-27 जनवरी को भारत दौरे पर आएंगे। वे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और 27 जनवरी को शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। कई रिपोर्ट्स में संकेत है कि इसी दौरान समझौते की घोषणा या हस्ताक्षर हो सकते हैं।
संवेदनशील मुद्दे और समझौते
कृषि और डेयरी क्षेत्र को समझौते से बाहर रखा गया है, ताकि लाखों छोटे किसानों की रक्षा हो सके। ईयू भारत से कारों, मेडिकल डिवाइस, वाइन, स्पिरिट्स और मीट पर भारी टैरिफ कटौती चाहता है (भारत में कारों पर आयात शुल्क 100% से ज्यादा है)। वहीं भारत को चिंता है कि ईयू का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) उसके स्टील निर्यात को प्रभावित करेगा और स्टील आयात पर कुल सीमा लगाएगा।
भारत श्रम-गहन वस्तुओं जैसे टेक्सटाइल, लेदर और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए ड्यूटी-फ्री एक्सेस और अपने ऑटो सेक्टर की तेज मान्यता चाहता है। समझौता सिर्फ माल तक सीमित नहीं रहेगा—यह सेवाओं, निवेश, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा और हरित प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाएगा। यूरोपीय निवेश भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ेगा।
अमेरिकी वार्ता में रुकावट
ईयू के साथ प्रगति ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की बातचीत पिछले साल संचार टूटने से रुक गई। ट्रंप प्रशासन के टैरिफ बढ़ोतरी ने भारत को नए बाजारों की तलाश में मजबूर किया है। अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी है और दोनों पक्ष तैयार होने पर समझौता होगा।
यह डील वैश्विक व्यापार में नया मोड़ ला सकती है, जहां संरक्षणवाद बढ़ रहा है और चीन-रूस पर निर्भरता कम करने की कोशिश है। हालांकि, नियामक संरेखण, श्रम-पर्यावरण मानकों और पेरिस जलवायु समझौते पर प्रतिबद्धताओं जैसे चुनौतियां बाकी हैं।







