विदेश डेस्क, शुभम कुमार तिवारी।
बाकू (अज़रबैजान)। भारत और अज़रबैजान ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय शांति को आगे बढ़ाने में साझा हितों पर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अज़रबैजान की राजधानी बाकू में कहा कि दोनों देशों के बीच शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां मिलकर काम किया जा सकता है।
समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि भारत और अज़रबैजान आतंकवाद, क्षेत्रीय संघर्ष और अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
शांति और स्थिरता पर जोर
जयशंकर ने अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच शांति प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत क्षेत्र में स्थायी शांति का समर्थक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए निकाला जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की यह स्पष्ट मान्यता है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत, आपसी समझ और कूटनीतिक प्रयासों से होना चाहिए। पश्चिम एशिया, दक्षिण काकेशस और अन्य क्षेत्रों में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग के अवसर
भारत और अज़रबैजान के संबंधों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, परिवहन और संपर्क व्यवस्था महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और अन्य संपर्क परियोजनाओं का उल्लेख किया। इस तरह की परियोजनाएं भारत को यूरेशिया और अन्य बाजारों से जोड़ने में मदद कर सकती हैं। बेहतर परिवहन संपर्क से व्यापार की लागत कम करने और वस्तुओं की आवाजाही को आसान बनाने के अवसर पैदा हो सकते हैं। जयशंकर ने कहा कि संपर्क व्यवस्था केवल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूत करती है।
सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के संपर्क पर भी चर्चा
विदेश मंत्री ने भारत और अज़रबैजान के बीच पुराने सांस्कृतिक और जन-संपर्क संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की संस्कृतियों और मूल्यों के प्रति सम्मान बेहतर साझेदारी की नींव बन सकता है। उन्होंने शिक्षा, पर्यटन, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया। लोगों के बीच संपर्क बढ़ने से दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे की संस्कृति और समाज को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिल सकता है।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श
जयशंकर ने कहा कि दोनों देश स्वतंत्र विदेश नीति अपनाते हैं और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर रणनीतिक दृष्टिकोण से चर्चा किए जाने की बात भी कही।
भारत और अज़रबैजान के संबंधों में आर्थिक अवसरों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहना भविष्य के सहयोग के लिए अहम माना जा रहा है।
भारत की ओर से शांति, स्थिरता और संवाद पर दिया गया जोर ऐसे समय में सामने आया है, जब कई क्षेत्रों में संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग की वास्तविक प्रगति आने वाले समय में व्यापार, निवेश, संपर्क परियोजनाओं और कूटनीतिक संवाद के नतीजों से स्पष्ट होगी।







