नेशनल डेस्क, अश्विनी कुमार।
अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्मण महासंघ द्वारा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
नई दिल्ली/ मोतिहारी: बिहार में जाति प्रमाण-पत्रों में पूर्व से दर्ज “भूमिहार ब्राह्मण” के स्थान पर केवल “भूमिहार” अंकित किए जाने को लेकर अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्मण महासंघ ने आपत्ति जताई है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुमार शेखर ने इस संबंध में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) से शिकायत कर बिहार सरकार के वर्तमान निर्देश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने तथा पूर्व प्रचलित “भूमिहार ब्राह्मण” पहचान को यथावत रखने की मांग की है।
महासंघ का कहना है कि बिहार में अनेक पुराने सरकारी एवं पारिवारिक अभिलेखों में समुदाय की पहचान “भूमिहार ब्राह्मण” के रूप में दर्ज रही है। वर्तमान में केवल “भूमिहार” अंकित किए जाने से पिता के पुराने प्रमाण-पत्र और उनकी संतानों के नए प्रमाण-पत्रों में अंतर उत्पन्न हो रहा है, जिससे पारिवारिक एवं सामाजिक पहचान को लेकर असंगति पैदा हो रही है।
शेखर ने NHRC को भेजी शिकायत में कहा है कि यदि किसी समुदाय की पहचान पहले से सरकारी अभिलेखों में “भूमिहार ब्राह्मण” के रूप में दर्ज रही है, तो बिना स्पष्ट वैधानिक आधार उसके नाम से “ब्राह्मण” शब्द हटाकर केवल “भूमिहार” अंकित किया जाना गंभीर विषय है। महासंघ ने इसे समुदाय की पारंपरिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा मामला बताया है।
महासंघ ने आयोग से मांग की है कि “भूमिहार ब्राह्मण” के स्थान पर केवल “भूमिहार” लिखे जाने संबंधी वर्तमान निर्देश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए, पूर्व से वैध सरकारी अभिलेखों में दर्ज “भूमिहार ब्राह्मण” पहचान को यथावत मान्यता दी जाए तथा जिन नागरिकों की संतानों के प्रमाण-पत्रों में केवल “भूमिहार” दर्ज किया गया है, उन्हें आवश्यक प्रक्रिया के माध्यम से संशोधन की सुविधा दी जाए।
शिकायत में महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी अन्य जाति या समुदाय के अधिकारों को प्रभावित करना नहीं, बल्कि भूमिहार ब्राह्मण समुदाय की पूर्व से चली आ रही और सरकारी अभिलेखों में दर्ज पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखना है।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मनीष कुमार शेखर ने अपने पत्र में भूमिहार ब्राह्मण समुदाय को अयाचक ब्राह्मण परंपरा से जोड़ते हुए विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित नामों का भी उल्लेख किया है और कहा है कि समुदाय की पहचान का प्रश्न केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं, बल्कि उसकी सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा है। शेखर ने लिखा है कि भगवान परशुराम के साथ चलने वाले अयाचक ब्राह्मण जिन्होने दान लेने को इन्कार कर दिया और कृषि कार्य को अपना मुख्य पेशा बनाया देश के विभिन्न कोनों मे भिन्न.भिन्न नाम से जाने जाते है। ये अयाचक ब्राह्मण बिहार झारखण्ड एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश मे भूमिहार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा मे त्यागी, महाराष्ट्र मे चितपावन तथा देशस्थ, मध्य प्रदेश मे गालव, पंजाब हिमाचल प्रदेश तथा जम्मु मे मोहियाल, राजस्थान में पुष्कर्ण, बंगाल में बारिन्द्रो, उड़ीसा में हलवा, कश्मीर में कौल, गुजरात में अनाविल, आन्ध्र प्रदेश में नियोगी, कर्नाटक में हब्यक, तमिलनाडु में अयंगार तथा केरला मे नम्बूदरी के नाम से जाने जाते है।
मनीष कुमार शेखर ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर बिहार सरकार को वर्तमान निर्देश निरस्त करने तथा “भूमिहार ब्राह्मण” की पूर्व प्रचलित पहचान को यथावत रखने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।
मनीष कुमार शेखर
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्मण महासंघ, नई दिल्ली
मोबाइल 9910623355
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