विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
न्यूयॉर्क। भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा है कि वह और उनका परिवार पिछले रविवार को औरोरा स्थित एक मंदिर में मौजूद थे, जब एक किशोर ने वहां गोलीबारी करने की कोशिश की। घटना को लेकर कृष्णमूर्ति ने अपनी चिंता और भय जाहिर किया। उन्होंने कहा कि एक श्वेत वर्चस्ववादी द्वारा भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बनाकर मंदिर में गोलीबारी की कोशिश किया जाना बेहद गंभीर और डराने वाला है। उनका कहना है कि इस तरह की घटना यह दिखाती है कि भारतीयों के खिलाफ नफरत और श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा कितनी खतरनाक हो चुकी है।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि निर्दोष लोगों के मारे जाने का इंतजार किए बिना ऐसे खतरों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने मंदिर में मौजूद अपने परिवार के साथ इस हमले की कोशिश का सामना करने के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वह इस घटना से भयभीत हैं। उनके मुताबिक, धार्मिक स्थलों पर इस तरह की हिंसा की कोशिश केवल किसी एक समुदाय के लिए खतरा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
घटना पर कई अमेरिकी सांसदों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सांसद रिच मैककार्मिक, रो खन्ना, अमी बेरा, जेमी रास्किन और हेले स्टीवंस समेत कई नेताओं ने गोलीबारी की कोशिश पर नाराजगी जताई। सांसदों ने कहा कि किसी भी अमेरिकी नागरिक को अपने धर्म का पालन करते समय अपनी सुरक्षा को लेकर डरना नहीं चाहिए। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने वाली नफरत और हिंसा के खिलाफ सभी समुदायों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
कैलिफोर्निया के सांसद रो खन्ना ने खुद को हिंदू अमेरिकी बताते हुए मंदिर में गोलीबारी की कोशिश पर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि श्वेत वर्चस्ववादी की ओर से मंदिर को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने हिंदू धर्म की अहिंसा की शिक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमलावर की इस तरह की कार्रवाई उसकी अज्ञानता को भी दर्शाती है। वहीं, सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा कि दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ ऑनलाइन और राजनीतिक स्तर पर हमले बढ़े हैं। उन्होंने नफरत, नस्लवाद और हिंसा को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समुदायों को गहरा आघात पहुंचा रही हैं और इन्हें रोकना जरूरी है।
सांसद जेमी रास्किन ने धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने वाली श्वेत वर्चस्ववादी नफरत और हिंसा के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने मंदिरों के साथ-साथ सिनेगॉग, चर्च और मस्जिदों को भी ऐसी हिंसा से बचाने की जरूरत पर जोर दिया। सांसद रिच मैककार्मिक ने कहा कि किसी व्यक्ति के धर्म, राजनीतिक विचारधारा या नस्ल के आधार पर उसके खिलाफ हिंसा करना गलत है। वहीं सांसद अमी बेरा ने कहा कि नफरत से प्रेरित हिंसा से निपटने और समुदायों को ऐसे खतरों से सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस को और कदम उठाने चाहिए।
सांसद श्री थानेदार ने भी कांग्रेस से हिंदू विरोधी हमलों में कथित बढ़ोतरी से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की। उनका कहना है कि हिंदू समुदाय को निशाना बनाने वाली घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और इनके खिलाफ गंभीरता से कार्रवाई जरूरी है। इस बीच, हाल ही में भारत की यात्रा कर चुकी सांसद हेले स्टीवंस ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय-अमेरिकी अमेरिकी समाज और देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और वे इससे बेहतर व्यवहार के हकदार हैं।
मंदिर में हुई गोलीबारी की कोशिश के बाद अमेरिकी सांसदों की प्रतिक्रियाओं में धार्मिक स्वतंत्रता, नस्लीय नफरत और समुदायों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। राजा कृष्णमूर्ति ने भी इस घटना को भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ नफरत और श्वेत वर्चस्ववाद के बढ़ते खतरे से जोड़ते हुए इसे गंभीरता से लेने की बात कही है। उनका कहना है कि किसी बड़ी त्रासदी के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसे खतरों की पहचान कर समय रहते उन्हें रोकना जरूरी है।







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