नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी
दोपहर गोचर से 14 जनवरी पर ही मनाएं मुख्य अनुष्ठान
नई दिल्ली। मकर संक्रांति 2026 को लेकर लोगों में भ्रम है कि यह 14 जनवरी को मनाई जाएगी या 15 को। पंचांग के अनुसार बुधवार 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे उत्तरायण शुरू होगा। इसलिए मुख्य गोचर और अधिकांश अनुष्ठान 14 जनवरी को ही होंगे।
यह सौर पर्व है, जो सूर्य के उत्तरायण से जुड़ा है। उत्तरायण में दिन लंबे होने लगते हैं, रातें छोटी पड़ती हैं। यह प्रकाश पर अंधकार की जीत का प्रतीक है, जहां नई ऊर्जा, समृद्धि और शुभ शुरुआत की कामना की जाती है।
तिथि भ्रम का कारण क्या?
भ्रम इसलिए है क्योंकि कुछ परंपराओं में सूर्योदय आधारित तिथि देखी जाती है। अगर गोचर सूर्यास्त के करीब या बाद में हो तो कुछ अनुष्ठान अगले दिन कर लिए जाते हैं। लेकिन इस बार दोपहर में गोचर होने से कोई जरूरत नहीं। ड्रिक पंचांग और प्रमुख कैलेंडर 14 जनवरी को ही मुख्य तिथि मानते हैं।
इस साल क्यों खास संयोग?
14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, जो करीब 23 साल बाद ऐसा संयोग है। एकादशी व्रत और संक्रांति एक साथ होने से दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि एकादशी पर चावल वर्जित होने से खिचड़ी पर्व 15 जनवरी (द्वादशी) को मनाना उचित रहेगा।
पुण्य काल और स्नान-दान का समय
- संक्रांति क्षण: 14 जनवरी, दोपहर 3:13 बजे
- महापुण्य काल: दोपहर 3:13 से शाम 4:58 बजे तक
- पुण्य काल: दोपहर 3:13 से शाम 5:45 बजे तक
इस दौरान स्नान, सूर्य को अर्घ्य, तिल-गुड़ का दान और पूजा विशेष फलदायी है। सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें, तिल-गुड़ दान करें, जरूरतमंदों को कंबल-अनाज दें।
क्या करें और क्या न करें?
स्नान-दान, सूर्य पूजा, दान-पुण्य पर जोर दें। घर में दीपक जलाएं, बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। 14 जनवरी को एकादशी होने से चावल से परहेज रखें, क्रोध-विवाद से दूर रहें।







