नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम बिना उचित प्रक्रिया के सूची से हटा दिए गए। ममता बनर्जी के अनुसार लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मामला सामने आया है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय है।
करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य मुद्दा पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर पैदा हुआ विवाद रहा। मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया से आहत और दुखी हैं। उनका आरोप है कि लोगों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एसआईआर कराना ही था तो इसे बेहतर योजना और सभी राज्यों के लिए समान रूप से क्यों नहीं लागू किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया नहीं हुई, जबकि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को निशाना बनाया गया। जन्म प्रमाण पत्र मांगे जाने पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि पहले अधिकतर जन्म घरों में होते थे, ऐसे में हर नागरिक के पास यह दस्तावेज होना संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एसआईआर के दौरान बूथ लेवल एजेंट समेत 150 से अधिक लोगों की मौत हुई और कई जीवित लोगों को मतदाता सूची में मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी प्रश्न उठाए और कहा कि चुनाव लोकतंत्र का उत्सव हैं, लेकिन ऐसी कार्रवाइयां मतदाताओं के भरोसे को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह प्रभावित लोगों को सामने लाकर अपनी बात साबित करेंगी।







