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मतदाता सूची विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख बरकरार

नेशनल डेस्क,श्रेयांश पराशर l

नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। ये याचिकाएं उन व्यक्तियों की ओर से दायर की गई थीं, जो ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए थे, जबकि वे वर्तमान विधानसभा चुनाव में निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

मामले की सुनवाई सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने की। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे सीधे अपीलीय न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) का रुख करें, जिन्हें शीर्ष अदालत के निर्देश पर ही इस प्रकार के विवादों की सुनवाई के लिए गठित किया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. शमशाद ने अदालत में दलील दी कि कई निर्वाचन अधिकारियों के नाम बिना ठोस कारण के मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे उनके संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से परहेज किया और निर्धारित वैकल्पिक कानूनी व्यवस्था अपनाने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने यह स्वीकार किया कि जिन लोगों की अपीलें अभी लंबित हैं, वे संभवतः पश्चिम बंगाल के मौजूदा विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। फिर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि अपील प्रक्रिया जारी रखकर भविष्य में मतदाता सूची में नाम बहाल कराया जा सकता है।

अदालत ने यह भी जानकारी दी कि वर्तमान में लगभग 19 अपीलीय न्यायाधिकरण सक्रिय हैं, जो संबंधित मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। इससे पहले 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जिन मतदाताओं के नाम चुनाव से कम से कम दो दिन पहले ट्रिब्यूनल द्वारा बहाल कर दिए जाते हैं, वे मतदान के पात्र होंगे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान संपन्न हो चुका है, जबकि दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है।