लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: दुनिया में हर तरह के लोग मिलते हैं। कुछ लोग अपने सिद्धांतों, विचारों और रिश्तों के प्रति ईमानदार रहते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी होते हैं जो परिस्थितियों और अपने स्वार्थ के अनुसार अपना व्यवहार बदल लेते हैं। ऐसे लोगों की तुलना धूल से की जा सकती है, जो हवा का रुख देखकर उसी दिशा में उड़ने लगती है।
उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322 ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
मतलबी इंसान का अपना कोई स्थायी सिद्धांत नहीं होता। जब तक किसी व्यक्ति से उसका लाभ जुड़ा रहता है, तब तक वह उसके साथ खड़ा दिखाई देता है। लेकिन जैसे ही परिस्थितियाँ बदलती हैं या लाभ का रास्ता बंद होता है, उसका व्यवहार भी बदल जाता है। वह बिना किसी संकोच के उसी दिशा में चल पड़ता है, जहाँ उसे अपना स्वार्थ दिखाई देता है।
ऐसे लोग रिश्तों को भावनाओं से नहीं, बल्कि फायदे और नुकसान की नजर से देखते हैं। सफलता के समय वे सबसे करीब दिखाई देंगे और कठिन समय आते ही धीरे-धीरे दूर हो जाएंगे। उनका साथ अक्सर उतना ही होता है, जितना उनके स्वार्थ को पूरा करने के लिए आवश्यक हो।
वास्तव में इंसान की पहचान उसके अच्छे समय के व्यवहार से नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में उसके चरित्र से होती है। जो व्यक्ति कठिन समय में भी अपने सिद्धांतों और रिश्तों के साथ खड़ा रहता है, वही सच्चा और भरोसेमंद इंसान कहलाता है।
हमें ऐसे लोगों से नफरत करने के बजाय उनसे सावधान रहना चाहिए। साथ ही स्वयं भी यह प्रयास करना चाहिए कि हमारा व्यवहार परिस्थितियों के अनुसार नहीं, बल्कि संस्कारों और सिद्धांतों के अनुसार तय हो।
हवा का रुख बदलने पर धूल अपनी दिशा बदल देती है, लेकिन मजबूत वृक्ष अपनी जड़ें नहीं बदलता। इंसान को भी धूल की तरह हर हवा के साथ बहने के बजाय वृक्ष की तरह अपने मूल्यों में मजबूती से खड़ा रहना चाहिए।
क्योंकि स्वार्थ से बने रिश्ते समय के साथ समाप्त हो जाते हैं, लेकिन विश्वास, सिद्धांत और सच्चे व्यवहार से बने रिश्ते समय के थपेड़ों में भी कायम रहते हैं।







