विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ आठ महीने से जारी युद्ध और पेट्रोल-गैस की बढ़ती कीमतों ने उनकी पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचाया। उन्होंने माना कि युद्ध के आर्थिक प्रभावों से अमेरिकी मतदाता नाराज थे और इसका असर चुनावी नतीजों में दिखाई दिया। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी था और अमेरिका आगे भी अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। युद्ध को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को पद से हटाने की संभावना भी खारिज कर दी। ट्रंप ने कहा कि हेगसेथ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
चुनाव में हार के बाद ट्रंप के तेवरों में कुछ नरमी भी देखने को मिली। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को जीत की बधाई देते हुए देश के हित में उसके नेताओं के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वह अमेरिका की भलाई के लिए डेमोक्रेट्स के साथ सहयोग करने की उम्मीद रखते हैं। वहीं, दूसरे साक्षात्कार में ट्रंप ने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने की बात कही। हालांकि, उनका नरम रुख ज्यादा समय तक कायम नहीं रहा और वह जल्द ही अपने पुराने आक्रामक अंदाज में लौट आए। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की हार की एक वजह खुद का चुनाव मैदान में उम्मीदवार के तौर पर मौजूद नहीं होना भी बताया। साथ ही चेतावनी दी कि डेमोक्रेट्स के ऐसे विधेयकों को राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर रोक दिया जाएगा, जिनसे वह सहमत नहीं होंगे।
उधर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार के पीछे ईरान युद्ध को प्रमुख कारण बताया। चुनावी नतीजों से स्पष्ट हो गया है कि बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-गैस की कीमतें और विदेश नीति से जुड़े फैसले ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गए हैं। युद्ध के आर्थिक असर से नाराज मतदाताओं ने चुनाव में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। इस हार ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों और ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर अमेरिकी राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान में अमेरिकी चुनाव के नतीजों पर जश्न
अमेरिका में ट्रंप की पार्टी को मिली हार के बाद ईरान में जश्न का माहौल देखने को मिला। वहां लोगों ने चुनावी नतीजों को अमेरिकी मतदाताओं की ओर से ट्रंप की युद्ध नीति को खारिज किए जाने के रूप में देखा। बुधवार को तेहरान में हजारों लोगों ने मार्च निकाला। यह आयोजन वर्ष 1979 में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की घटना की याद में किया गया था। इसके साथ ही लोगों ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों का जश्न भी मनाया। हालांकि, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक पत्र में कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि अमेरिका में राजनीतिक बदलाव से इस्लामी गणराज्य के प्रति उसकी शत्रुता बदल जाएगी, वे बड़ी गलतफहमी में हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी राजनीति में बदलाव के बावजूद ईरान के प्रति अमेरिका का रवैया बदलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलीबाफ ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी जनता ने युद्ध के खिलाफ अपना रुख जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों ने युद्ध को ना कहा है और ईरान इस संदेश का समर्थन करता है। इस बीच, ईरान की न्यायपालिका द्वारा संचालित एक समाचार मंच ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक व्यंग्यात्मक चुटकुले को साझा किया। इसमें कहा गया कि ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन कराने में नाकाम रहे, लेकिन टेक्सास में ऐसा करने में सफल हो गए। यह टिप्पणी अमेरिका के दक्षिणी राज्य टेक्सास में हुए चुनावी बदलाव को लेकर की गई थी, जहां कई दशकों में पहली बार किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने सीनेट का चुनाव जीता है।







