Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

महंगाई पर ट्रंप का मजाक, डेमोक्रेट्स ने उठाए सवाल

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वाशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास के कॉर्पस क्रिस्टी में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान महंगाई को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिस पर उनके समर्थक हंसने लगे, जबकि डेमोक्रेटिक नेताओं ने उनकी आलोचना की। ट्रंप ने अपने आलीशान मार-ए-लागो रिसॉर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 5,000 डॉलर में मुश्किल से एक हैमबर्गर और छोटी-सी मिठाई ही खरीदी जा सकती है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब आम अमेरिकी परिवार बढ़ती कीमतों और घरेलू खर्चों का सामना कर रहे हैं।

ट्रंप ने यह बात अपने उस चुनावी वादे के संदर्भ में कही, जिसमें उन्होंने प्रत्येक अमेरिकी वयस्क को 5,000 डॉलर देने की बात कही है। हालांकि, इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बनाए रखने की शर्त से जोड़ा गया है। इस योजना को लागू करने के लिए लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था और प्रस्ताव को लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी मिलने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में ट्रंप की इस घोषणा और महंगाई पर उनकी टिप्पणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

अमेरिका में महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ता खर्च इस समय चुनाव के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। प्यू रिसर्च सेंटर के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि उनकी आमदनी उनकी इच्छानुसार जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं है। वहीं, करीब 70 प्रतिशत लोगों ने बाहर खाना खाने जैसे गैरजरूरी खर्चों में कटौती की है। इसके बावजूद ट्रंप लगातार अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई और लोगों की खर्च उठाने की परेशानी को डेमोक्रेटिक पार्टी राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश कर रही है।

इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी ट्रंप की नीतियों और राजनीतिक रवैये पर निशाना साधा है। उन्होंने मतदाताओं से चुनाव में नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखकर मतदान करने की अपील की। ओबामा ने कहा कि समाज में ऐसी संस्कृति को बदलने की जरूरत है, जहां झूठ बोलने, धोखा देने और दूसरों को डराने-धमकाने जैसी गतिविधियों को सामान्य रूप से स्वीकार किया जाने लगा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब किसी व्यक्ति की अहमियत को केवल उसकी संपत्ति और पैसे के आधार पर मापा जाने लगता है, तो व्यवस्था की खामियों और आर्थिक समस्याओं को दूर करना मुश्किल हो जाता है।

ओबामा इससे पहले व्हाइट हाउस में ट्रंप की ओर से कराए जा रहे बदलावों को लेकर भी व्यंग्य कर चुके हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस की बदली हुई बनावट और सजावट पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि इमारत ऐसी दिखाई देती है, मानो वहां सद्दाम हुसैन ने चीजकेक फैक्टरी खोल दी हो। उनकी इस टिप्पणी को ट्रंप प्रशासन की ओर से व्हाइट हाउस में कराए जा रहे बदलावों पर तंज के तौर पर देखा गया। इस तरह चुनाव से पहले महंगाई, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक नैतिकता जैसे मुद्दों को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज होती जा रही है।

वहीं, ट्रंप को ओहायो में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मुद्दे पर भी प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ ट्रंप के कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए। इस पर ट्रंप ने जवाब देते हुए दावा किया कि उन्होंने लगभग 25 साल पहले ही एपस्टीन को अपने क्लब से बाहर कर दिया था। उन्होंने विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पैसे लेकर हंगामा करने का आरोप भी लगाया। मध्यावधि चुनाव से पहले महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, नैतिकता और एपस्टीन से जुड़ा विवाद अमेरिकी राजनीति में चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं।