स्टेट डेस्क, रानी कुमारी
महाराष्ट्र की जेलों में अप्राकृतिक मौतों के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार की वार्षिक रिपोर्ट ‘भारत में जेलें’ में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2024 के दौरान महाराष्ट्र इस मामले में देशभर में पांचवें स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार राज्य की जेलों में कुल आठ अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गईं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2024 में देश की 1,333 जेलों में कुल 1,960 कैदियों की मौत हुई। इनमें से 166 मौतों को अप्राकृतिक श्रेणी में रखा गया है। सबसे अधिक 26 अप्राकृतिक मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं। इसके बाद हरियाणा में 15, दिल्ली में 12, राजस्थान में नौ और महाराष्ट्र में आठ मामलों की पुष्टि हुई।
महाराष्ट्र में दर्ज आठ अप्राकृतिक मौतों में से छह मामले आत्महत्या के बताए गए हैं, जबकि दो कैदियों की मौत कथित तौर पर साथी कैदियों द्वारा हत्या किए जाने से हुई। रिपोर्ट के आंकड़ों ने जेलों में सुरक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य और कैदियों की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर की जेलों में कुल 5,11,542 कैदी बंद थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में बढ़ती भीड़, मानसिक तनाव और संसाधनों की कमी अप्राकृतिक मौतों के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जेल प्रशासन में सुधार, कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किए जाने की मांग की है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जेलों में निगरानी व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।







