नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
शिवाजी पार्क पर जुटे युवा, दिल्ली में 700 से ज्यादा हिरासत
मुंबई-नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को मुंबई और दिल्ली में बड़े प्रदर्शन हुए। मुंबई के शिवाजी पार्क पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर हजारों युवा जमा हुए, जबकि दिल्ली के जंतर मंतर और आसपास पुलिस ने 700 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
पुलिस ने मुंबई में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, फिर भी शिवाजी पार्क पहुंच गए युवा। दादर स्टेशन की तरफ से रास्ते बंद थे, सुरक्षा बल तैनात थे, लेकिन प्रदर्शनकारी मैदान तक पहुंच गए। वहां नारेबाजी के साथ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार इतनी अक्षम है कि दो महीने में फिर सड़क पर उतरना पड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस को चुनौती दी कि वे प्रदर्शनकारियों को जेल भेज दें।
दिल्ली में जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। भारी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के बावजूद एआईएसए, एसएफआई, एनएसयूआई समेत छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के कार्यकर्ता पहुंचने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री अतिशी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) में कथित गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटने का विरोध कर रहे थे।
मुंबई प्रदर्शन में अभिनेत्री शबाना आजमी और गायक विशाल ददलानी भी शामिल हुए। शबाना आजमी ने कहा कि मतदान का अधिकार छीन लिया जाए तो विरोध करना हमारा हक है। संविधान हमें यह अधिकार देता है। सीजेपी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार पर आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की और कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव का नारा असल में एक राष्ट्र-एक पार्टी की ओर इशारा करता है।
प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची फ्रीज करने और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की भी मांग रखी। दिल्ली में एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने अगले दिन फिर जंतर मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जंतर मंतर 2.0 अभी खत्म नहीं हुआ, यह तो शुरुआत है।
दोनों शहरों में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद युवाओं का जमावड़ा दिखा कि मुद्दा व्यापक चर्चा में है। मुंबई में प्लेकार्ड पर ‘ज्ञानू मस्ट गो’, ‘ज्ञानेश ब्रदर जस्ट रिजाइन’ जैसे नारे दिखे। दिल्ली में भी इसी मांग को लेकर सड़कें गूंजती रहीं।







