विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वाशिंगटन। न्यू मेक्सिको की एक अदालत ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स को 25 अरब डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ने बुधवार को दिए फैसले में माना कि कंपनी ने एक मामले में उपभोक्ताओं को गुमराह किया था। यह मामला फेसबुक यूजरों के निजी डेटा से जुड़ा है और इसमें कंपनी पर लंबे समय तक गलत तरीके अपनाने के आरोप लगाए गए थे।
यह मामला 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव अभियान से जुड़े एक राजनीतिक परामर्श फर्म से संबंधित है। आरोप था कि इस फर्म ने लाखों फेसबुक यूजरों का निजी डेटा उनकी अनुमति के बिना हासिल किया था। इसी मामले को लेकर मेटा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी। अदालत में कंपनी के कारोबारी तौर-तरीकों और यूजरों के डेटा से जुड़े व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
न्यायाधीश फ्रांसिस मैथ्यू ने अपने आदेश में कहा कि फेसबुक की गलतियां कई वर्षों तक जारी रहीं और धीरे-धीरे व्यवस्थित रूप से जनता के सामने आती रहीं। उनके अनुसार, ये गलतियां कंपनी के मुख्य कारोबारी तौर-तरीकों से जुड़ी हुई थीं। अदालत ने राज्य के कानून के तहत मेटा पर 219 अरब डॉलर से अधिक का दंड लगाए जाने को उचित माना था, लेकिन न्यायाधीश ने अंतिम राशि को घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि में कैंब्रिज एनालिटिका नाम की ब्रिटिश राजनीतिक परामर्श कंपनी भी है। आरोप के अनुसार, इस कंपनी ने एक थर्ड-पार्टी एप के माध्यम से फेसबुक के करीब 8.7 करोड़ यूजरों का निजी डेटा जुटाया था। इस डेटा के संग्रह और उसके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद फेसबुक की डेटा गोपनीयता व्यवस्था पर व्यापक सवाल उठे थे।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने वर्ष 2021 में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। राज्य की ओर से आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने अपने यूजरों के डेटा की सुरक्षा और उसके इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को लेकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया। इसके बाद मामले में लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली और अब अदालत ने मेटा पर भारी जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।
अदालत के फैसले में फेसबुक की ओर से की गई कथित गलतियों को केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि उन्हें लंबे समय तक जारी रहने वाली प्रक्रिया के रूप में देखा गया। न्यायाधीश ने माना कि कंपनी के तौर-तरीकों का असर बड़ी संख्या में यूजरों पर पड़ा। इसी आधार पर राज्य के कानून के तहत भारी दंड की संभावना बनी, हालांकि अदालत ने उसे घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया।
फैसले के बाद मेटा के प्रवक्ता से मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन तत्काल कोई जवाब नहीं मिला। अदालत का यह आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूजरों के निजी डेटा की सुरक्षा और कंपनियों की जिम्मेदारी से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले में फेसबुक यूजरों के डेटा को उनकी सहमति के बिना हासिल किए जाने के आरोप और कंपनी के कथित भ्रामक कारोबारी तरीकों को केंद्र में रखा गया है।







