लोकल डेस्क, आर्या कुमारी।
मोतिहारी। शहर की पहचान और प्रमुख पर्यटन स्थल मोतीझील एक बार फिर जलकुंभी की चपेट में आ गई है। बरसात शुरू होते ही झील के कई हिस्सों में जलकुंभी तेजी से फैल गई है, जिससे झील की खूबसूरती प्रभावित होने लगी है। इसका सबसे अधिक असर बोटिंग गतिविधियों पर पड़ा है। एक सप्ताह पहले तक जहां पर्यटक नौका विहार का आनंद ले रहे थे, वहीं अब जलकुंभी के घने फैलाव के कारण बोटिंग लगभग पूरी तरह ठप हो गई है। झील के बीच स्थापित फाउंटेन भी जलकुंभी से घिर चुका है, जिससे पर्यटकों में निराशा का माहौल है।
झील के किनारे घूमने आने वाले लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले तक मोतीझील का दृश्य बेहद आकर्षक था, लेकिन अचानक बढ़ी जलकुंभी ने इसकी प्राकृतिक सुंदरता को फीका कर दिया है। शाम के समय बड़ी संख्या में पहुंचने वाले स्थानीय लोग और पर्यटक अब पहले जैसी रौनक नहीं देख पा रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सफाई नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जलकुंभी की सफाई के लिए प्रशासन की ओर से विशेष मशीन की व्यवस्था की गई थी, जिसके जरिए समय-समय पर झील की सफाई कर इसके फैलाव पर नियंत्रण रखा जाता था। हालांकि हाल के दिनों में मशीन की रफ्तार धीमी पड़ने से जलकुंभी ने झील के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में जलकुंभी तेजी से बढ़ती है, इसलिए नियमित सफाई नहीं होने पर पूरी झील प्रभावित हो सकती है, जिससे पर्यावरण और पर्यटन दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
मोतीझील के सौंदर्यीकरण के तहत करीब तीन वर्ष पहले जलकुंभी हटाने और झील की गाद साफ करने के लिए लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से विशेष मशीन खरीदी गई थी। शुरुआत में मशीन ने प्रभावी ढंग से काम किया, लेकिन करीब एक वर्ष बाद तकनीकी कारणों से बंद हो गई। बाद में सरकारी पहल पर इसे फिर से चालू कराया गया और झील की स्थिति में काफी सुधार भी देखने को मिला। अब एक बार फिर मशीन की कार्यक्षमता प्रभावित होने से जलकुंभी तेजी से फैलने लगी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मशीन काम कर रही है और जल्द ही व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा।
झील में पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से करीब 20 लाख रुपये की लागत से तीन फाउंटेन भी लगाए गए थे। शुरुआती अवधि तक इनके संचालन के बाद तकनीकी खराबी आने से ये बंद हो गए। प्रशासनिक प्रयासों से इन्हें एक बार फिर चालू कराया गया, लेकिन कुछ महीनों बाद दोबारा खराब होने के कारण फिलहाल सभी फाउंटेन बंद पड़े हैं। नगर आयुक्त आशीष कुमार ने बताया कि फाउंटेन की मरम्मत कराने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इन्हें दोबारा संचालित किया जाएगा।
मोतीझील के किनारे विकसित मरीन ड्राइव और रोइंग क्लब व गायत्री मंदिर के समीप संचालित बोटिंग व्यवस्था ने इस पर्यटन स्थल की लोकप्रियता बढ़ाई थी। इससे लोगों को झील की सुंदरता का करीब से आनंद लेने का अवसर मिलता था, वहीं प्रशासन को भी राजस्व प्राप्त होता था। लेकिन जलकुंभी के बढ़ते फैलाव और बोटिंग प्रभावित होने से झील की स्थिति फिर पुराने दौर जैसी होती दिख रही है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से जल्द मशीन के माध्यम से व्यापक सफाई अभियान चलाकर जलकुंभी हटाने और मोतीझील की सुंदरता बहाल करने की मांग की है।







