लोकल डेस्क, एन के सिंह।
राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूक करेगा 'न्याय रथ', प्रधान जिला जज ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना।
पूर्वी चम्पारण: अदालती चक्करों, सालों लंबी तारीखों और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए मोतिहारी का विधिक सेवा प्राधिकार एक बार फिर आम जनमानस के द्वार पर खड़ा है। आगामी 14 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को ऐतिहासिक बनाने के उद्देश्य से आज बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) परिसर से एक विशेष 'प्रचार रथ' को रवाना किया गया।
न्याय की चौखट, अब जनता के द्वार
इस अभियान का शुभारंभ माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष (DLSA) अभिषेक कुमार दास एवं सचिव नितिन त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर किया। यह रथ महज एक वाहन नहीं, बल्कि उन हजारों वादकारियों के लिए उम्मीद की किरण है जो लंबे समय से अपने विवादों के अंत की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यह प्रचार रथ जिले के हर प्रखंड, न्यायालय परिसरों और प्रमुख चौक-चौराहों पर गूँजते संदेशों के माध्यम से लोगों को बताएगा कि कैसे लोक अदालत के माध्यम से समय, धन और श्रम की बचत की जा सकती है।
अधिकारी बोले: "सहमति में ही सुख है"
कार्यक्रम के दौरान माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अभिषेक कुमार दास ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि "राष्ट्रीय लोक अदालत केवल एक विधिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सौहार्दपूर्ण समाधान का एक सशक्त मंच है। यहाँ न किसी की हार होती है, न किसी की जीत—सिर्फ न्याय की जीत होती है।"
वहीं, सचिव नितिन त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि इस बार बैंक ऋण, बीमा दावा, पारिवारिक विवाद, बिजली-टेलीफोन बिल और चेक बाउंस जैसे सुलह योग्य मामलों का त्वरित निपटारा किया जाएगा।
न्यायिक जगत की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य जागरूकता अभियान के साक्षी मोतिहारी के तमाम वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी बने। कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय) इसरार अहमद, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गण सुरेंद्र प्रसाद, अरुण कुमार सिन्हा, कमलेश मिश्रा, ब्रजेश कुमार, मुकुंद कुमार, श्रीमती रेशमा वर्मा एवं श्रीमती ऋचा भार्गव उपस्थित रहे। साथ ही मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पुनीत कुमार तिवारी समेत कई अन्य अधिकारियों और अग्रणी बैंक प्रबंधक राजेंद्र पांडे ने भी सहभागिता कर इस अभियान को बल दिया।
क्यों खास है लोक अदालत?
इसमें कोर्ट फीस नहीं लगती, और यदि मामला पहले से लंबित है, तो जमा की गई कोर्ट फीस वापस हो जाती है।
सालों का विवाद चंद मिनटों की आपसी बातचीत से सुलझ जाता है।
लोक अदालत के फैसले के खिलाफ कहीं अपील नहीं होती, जिससे कानूनी झंझट हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
यहाँ दोनों पक्ष हाथ मिलाकर बाहर निकलते हैं, जिससे सामाजिक कड़वाहट खत्म होती है।
अपील यदि आपका भी कोई मामला न्यायालय में लंबित है या प्री-लिटिगेशन स्तर पर है, तो 14 मार्च को अपने नजदीकी न्यायालय पहुँचें और समझौते के माध्यम से एक नई शुरुआत करें।







