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मोतिहारी में 103 साल की महिला ने 32 साल बाद जीती जमीन की जंग

लोकल डेस्क, आर्या कुमारी।

मोतिहारी/कल्याणपुर (पूर्वी चंपारण)। पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड के मंगलापुर गांव की 103 वर्षीय हबीबन को 32 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार अपनी खरीदी हुई जमीन पर कब्जा मिल गया। उम्र के इस पड़ाव पर न्याय मिलने की खुशी तो है, लेकिन इस जीत का सबसे बड़ा दर्द यह है कि उनके पति नईमुल्लाह अंसारी, जिन्होंने इस जमीन के लिए पूरी जिंदगी संघर्ष किया, आज इस खुशी को देखने के लिए जीवित नहीं हैं। प्रशासन की मौजूदगी में उन्हें जमीन का कब्जा दिलाया गया, जिससे तीन दशक पुराना विवाद समाप्त हो गया।

हबीबन के परिवार के पास घर के अलावा कोई जमीन नहीं थी। ऐसे में उन्होंने अपना स्त्रीधन और वर्षों की जमा पूंजी बेचकर 6 मार्च 1993 को अफाक मियां से एक कट्ठा चार धूर जमीन खरीदी थी। पति-पत्नी ने इसी जमीन पर अपना आशियाना बसाने का सपना देखा था। लेकिन दो दिन बाद ही उनके चचेरे भाई लियाकत अंसारी ने उसी जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया और मामला अदालत पहुंच गया।

नईमुल्लाह अंसारी ने वर्ष 1994 में मोतिहारी मुंसिफ कोर्ट में मुकदमा दायर किया। अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद मामला जिला जज की अदालत पहुंचा, जहां वर्ष 2004 में भी फैसला नईमुल्लाह के पक्ष में ही रहा। हालांकि लियाकत अंसारी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए वर्ष 2010 में उच्च न्यायालय का रुख किया। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने भी उनकी अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

अदालतों से लगातार जीत मिलने के बावजूद हबीबन के परिवार को जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। इसी दौरान करीब आठ वर्ष पहले नईमुल्लाह अंसारी का निधन हो गया। पति की मौत के बाद भी हबीबन न्याय मिलने की उम्मीद में इंतजार करती रहीं। आखिरकार हाई कोर्ट के आदेश और मुंसिफ कोर्ट की प्रक्रिया के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय से 4 जून 2026 को जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए आदेश जारी किया गया।

इसके बाद 8 जून 2026 को चकिया अनुमंडल पदाधिकारी की ओर से दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और जवानों की तैनाती का आदेश दिया गया। सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद रविवार को कोर्ट के प्रतिनिधि, दंडाधिकारी और पुलिस की मौजूदगी में हबीबन को संबंधित भूखंड का विधिवत कब्जा दिला दिया गया। करीब 32 वर्षों से चल रहा विवाद आखिरकार समाप्त हो गया और परिवार को अपनी खरीदी हुई जमीन वापस मिल गई।

हबीबन के पुत्र रहमतुल्लाह ने बताया कि परिवार को इंसाफ मिलने की खुशी है, लेकिन यह खुशी अधूरी भी है। उन्होंने कहा कि उनकी मां अब ठीक से बोल नहीं पातीं और कम सुनती हैं, फिर भी उन्हें इस बात का संतोष है कि जिस जमीन के लिए उनका पूरा जीवन संघर्ष में बीत गया, वह अब उनके अधिकार में है। हालांकि परिवार को सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि इस लड़ाई को अंत तक लड़ने वाले नईमुल्लाह अंसारी आज इस दिन को देखने के लिए जीवित नहीं हैं।