स्टेट डेस्क, एन. के. सिंह।
25 एकड़ भूमि की पैमाइश और सुरक्षा के लिए चहारदिवारी निर्माण का प्रस्ताव तैयार, अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन चलाएगा डंडा।
पूर्वी चंपारण: नीले आसमान को चीरते हुए विमानों का दीदार करने का चंपारण वासियों का सपना अब हकीकत में बदलने वाला है। रक्सौल के बाद अब जिला मुख्यालय मोतिहारी के हवाई अड्डे को पुनर्जीवित करने की कवायद ने एक बड़ा मोड़ ले लिया है। बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी 'सात निश्चय-3' के तहत जिले में हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे पूरे उत्तर बिहार में उत्साह का माहौल है। यह महज एक हवाई पट्टी का पुनरुद्धार नहीं है, बल्कि चंपारण की आर्थिक समृद्धि, शिक्षा की पहुँच और पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर एक नई इबारत लिखने की दिशा में बढ़ा हुआ एक ऐतिहासिक कदम है।
राज्य सरकार ने इस दिशा में निर्णायक पहल करते हुए केंद्र सरकार की 'उड़ान' (उड़े देश का आम नागरिक) योजना में मोतिहारी हवाई अड्डे को शामिल करने के लिए नागर विमानन मंत्रालय को औपचारिक अनुरोध भेजा है। यह कदम जिला प्रशासन और सरकार की उस गंभीरता को दर्शाता है, जिसके तहत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को 'पूर्व व्यवहार्यता अध्ययन' के लिए आवश्यक राशि का भुगतान भी कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि तकनीकी सर्वे के बाद इस हवाई अड्डे के विकास का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा, जिससे आने वाले समय में यहाँ से छोटे विमान नियमित रूप से उड़ान भर सकेंगे।
हवाई अड्डे की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। उपलब्ध लगभग 25 एकड़ भूमि की सटीक पैमाइश का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि हवाई अड्डे की जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चहारदिवारी निर्माण के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा के नेतृत्व में तैयार की जा रही विस्तृत रिपोर्ट में उन सभी तकनीकी पहलुओं को शामिल किया गया है, जो एएआई की साइट विजिट से पहले अनिवार्य हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर ही हवाई अड्डे की ढांचागत सुविधाओं का ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा।
मोतिहारी के लिए यह हवाई सेवा किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से ही यहाँ देश-विदेश के शिक्षाविदों और छात्रों का आवागमन बढ़ा है, जिनके लिए अब तक लंबी दूरी का सड़क सफर एक बड़ी बाधा था। हवाई सेवा शुरू होने से न केवल शिक्षा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि केसरिया स्तूप जैसे ऐतिहासिक स्थलों के कारण यहाँ पर्यटन में भी भारी उछाल आने की उम्मीद है। किफायती दरों पर उपलब्ध होने वाली इन हवाई सेवाओं से स्थानीय व्यापार को एक नई गति मिलेगी और चंपारण सीधे तौर पर देश के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों से जुड़ जाएगा। यह पहल आधुनिक बिहार की उस तस्वीर को पेश करती है जहाँ विकास की पहुँच हर जिले के आम नागरिक तक सुनिश्चित की जा रही है।







