विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
मॉस्को। यूक्रेन ने बुधवार को रूस के सबसे बड़े डाटा सेंटर को ड्रोन हमले में निशाना बनाया, जिससे उसे भारी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इस हमले से रूस की कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी परियोजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बालाकोवो क्षेत्र में स्थित यह डाटा सेंटर साइबरबैंक के स्वामित्व में है और रूस एआई के क्षेत्र में अमेरिका तथा चीन की बराबरी करने के उद्देश्य से इसे विकसित कर रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमले में डाटा सेंटर में मौजूद सुपर कंप्यूटरों को कोई नुकसान पहुंचा है या नहीं।
इस डाटा सेंटर में फिलहाल तीन सुपर कंप्यूटर मौजूद हैं और यहां एक और अत्याधुनिक क्षमता वाला सुपर कंप्यूटर स्थापित करने की योजना है। रूस के लिए यह केंद्र एआई विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। साइबरबैंक रूस की सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल है और उसके बालाकोवो स्थित केंद्र में देश की कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ने 2024 में बताया था कि इसी डाटा सेंटर में रूस का सबसे बड़ा सुपर कंप्यूटर तैयार किया जा रहा है, जिसके 2027 तक काम शुरू करने की उम्मीद थी।
पिछले सप्ताह भी यूक्रेन की ओर से रूस की प्रौद्योगिकी कंपनियों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं। इस दौरान यांडेक्स के तीन डाटा सेंटरों पर हमले किए गए थे। हालांकि, बुधवार का हमला रूस के सबसे बड़े डाटा सेंटर पर हुआ। हमले के बाद साइबरबैंक के फर्स्ट डिप्टी सीईओ एलेक्जेंडर वेदियास्किन ने बताया कि ड्रोन हमले से डाटा सेंटर को नुकसान पहुंचा है, लेकिन कंपनी का कामकाज सामान्य रूप से जारी है और किसी तरह की रुकावट नहीं आई है। इसके बावजूद हमले से रूस के एआई कार्यक्रम की सुरक्षा और भविष्य की क्षमता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
साइबरबैंक और यांडेक्स ने यह जानकारी नहीं दी है कि उनके डाटा सेंटरों में मौजूद सुपर कंप्यूटरों को यूक्रेनी हमलों से कोई नुकसान हुआ है या नहीं। इन सुपर कंप्यूटरों का इस्तेमाल रूस में नए एआई मॉडल विकसित करने के लिए किया जा रहा है। इन मॉडलों का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीकी विकास और काम की गति बढ़ाने के लिए किए जाने की योजना है। हालांकि, रूस के एआई विकास कार्यक्रम के सामने पहले से ही कई चुनौतियां हैं। अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण साइबरबैंक और यांडेक्स जैसी कंपनियों को आधुनिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट यानी जीपीयू हासिल करने में मुश्किल हो रही है। ऐसे में डाटा सेंटर पर हुए हमले से रूस की एआई परियोजनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
इस बीच रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों को लेकर भी हमले जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना नहीं बनाने की व्यवस्था लागू होने की बात कही थी, लेकिन इसके 24 घंटे के भीतर ही दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए जाने की जानकारी सामने आई। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार, यूक्रेन ने बुधवार को रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया। इसके जवाब में रूस ने कीव और खार्कीव में करीब 30 बिजलीघरों पर हमला किया।
रूस के इन हमलों का असर आम लोगों पर भी पड़ा है। बिजलीघरों को निशाना बनाए जाने के बाद कीव और खार्कीव में करीब छह लाख लोगों के घरों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की जानकारी सामने आई है। हमलों में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। ऊर्जा ठिकानों पर हमले दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष में एक बार फिर नागरिक बुनियादी ढांचे को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं।
रूस के सबसे बड़े डाटा सेंटर पर ड्रोन हमला ऐसे समय हुआ है, जब दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष के साथ-साथ तकनीकी और ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। बालाकोवो के डाटा सेंटर को रूस की एआई महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां मौजूद सुपर कंप्यूटरों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। यदि कंप्यूटिंग ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचता है तो रूस की नई एआई परियोजनाओं और 2027 तक प्रस्तावित सुपर कंप्यूटर क्षमता बढ़ाने की योजना पर असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल साइबरबैंक ने अपने नियमित कामकाज में किसी बाधा से इनकार किया है।







