विदेश डेस्क,श्रेयांश पराशर l
जिनेवा l संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि गेन्नाडी गैटिलोव ने दावा किया है कि अमेरिकी परमाणु "सुरक्षा कवच" की विश्वसनीयता पर बढ़ते संदेह के कारण कई यूरोपीय देश अब अपनी स्वतंत्र सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप अब केवल अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर निर्भर रहने के बजाय अपने रक्षा तंत्र को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
रूसी राजनयिक के अनुसार, यह बदलाव केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावहारिक स्तर पर भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस पहले ही जर्मनी और पोलैंड के साथ परमाणु सहयोग को लेकर आगे बढ़ चुका है। हाल ही में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लड़ाकू विमानों के लिए संयुक्त फ्रांसीसी-जर्मन हवाई ईंधन भरने का अभ्यास भी आयोजित किया गया, जिसे यूरोप की बदलती रक्षा रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
गैटिलोव ने कहा कि जर्मनी में परमाणु हथियारों की संभावित तैनाती को लेकर सार्वजनिक बहस पहले से जारी है। वहीं, पोलैंड सहित कुछ अन्य देशों में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो रही है। उनका मानना है कि यूरोपीय देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और रक्षा तैयारियों को लेकर नई रणनीतियां विकसित की जा रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि फिनलैंड, एस्टोनिया और लिथुआनिया जैसे देश नाटो के भीतर अपनी भूमिका मजबूत करने और सहयोगी देशों के परमाणु हथियारों की संभावित तैनाती की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों पर यूरोपीय देशों या नाटो की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण यूरोप अपनी रक्षा नीतियों की समीक्षा कर रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा रणनीति में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।







