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रक्सौल में पहली बारिश में डूबा शहर: भारत-नेपाल मुख्य मार्ग पर 2 फीट पानी

लोकल डेस्क, वेरोनिका राय |

रक्सौल में पहली बारिश में ही डूबा शहर: भारत-नेपाल मुख्य मार्ग पर दो फीट पानी, नगर परिषद की नालों की सफाई का दावा हुआ फेल

गुरुवार सुबह की मानसूनी बारिश ने रक्सौल नगर परिषद की तैयारियों की पोल खोल दी। महज आधे घंटे की बारिश में ही शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया। बारिश की वजह से भारत-नेपाल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क समेत शहर के कई इलाकों में दो फीट तक पानी जमा हो गया। सड़कों पर पानी भरने से न केवल यातायात बाधित हुआ, बल्कि व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो गईं। यह स्थिति तब है जब नगर परिषद ने बारिश पूर्व नालों की सफाई का दावा किया था।
नगर परिषद की ओर से मानसून पूर्व बड़े पैमाने पर नालों की सफाई का दावा किया गया था। लेकिन गुरुवार की बारिश ने यह साफ कर दिया कि सारी तैयारियां केवल कागजों तक सीमित थीं। शहर के मुख्य बाजार, बाइपास रोड, स्टेशन रोड, आर्य समाज रोड और भारत-नेपाल सीमा मार्ग पर भारी जलजमाव देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल नगर परिषद की यही नीति रहती है—बरसात से पहले खानापूर्ति करना और बारिश में जनता को भगवान भरोसे छोड़ देना।
भारत-नेपाल मार्ग पर दो फीट तक पानी भर जाने से दोनों देशों के बीच चलने वाले व्यापारिक वाहनों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा। छोटे वाहन और दोपहिया वाहन जलजमाव में फंसते रहे। पैदल चलने वालों को भी भारी परेशानी हुई। शहर के कई इलाकों में दुकानों के अंदर तक पानी घुस गया जिससे व्यापारियों को नुकसान हुआ।
स्थानीय निवासी नगर परिषद की कार्यप्रणाली से खासे नाराज नजर आए। लोगों का कहना है कि हर साल यही हालात होते हैं लेकिन कभी कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता।
रक्सौल निवासी प्रमोद गुप्ता कहते हैं, "हर साल नगर परिषद सिर्फ सफाई का दिखावा करती है। लेकिन जैसे ही बारिश आती है, सारा झूठ सामने आ जाता है। हमें गंदे पानी में चलना पड़ता है, बीमारियां फैलती हैं।"
शहरी योजना से जुड़े जानकारों का कहना है कि रक्सौल जैसे सीमावर्ती शहर में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होना गंभीर चिंता का विषय है। बरसात की शुरुआत में ही जब हालात ऐसे हैं, तो आगे चलकर स्थिति और भी खराब हो सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल प्रभाव से जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो महामारी फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।


नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार ने इस विषय में सफाई देते हुए कहा कि, "अचानक तेज बारिश के कारण जलजमाव की स्थिति बनी है। कर्मचारियों को स्थिति सामान्य करने के लिए लगाया गया है। हम लगातार जल निकासी के लिए पंपिंग की व्यवस्था कर रहे हैं और व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं।"
शहरवासियों ने प्रशासन से तत्काल और स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ वर्षा से पहले सफाई दिखाना काफी नहीं है, बल्कि आधुनिक और टिकाऊ ड्रेनेज सिस्टम की जरूरत है। साथ ही बारिश से पहले और दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की मॉनिटरिंग भी जरूरी है ताकि जनता को हर साल की यह परेशानी न झेलनी पड़े।


रक्सौल की पहली बारिश ने नगर परिषद की लापरवाही और व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। जब बरसात की शुरुआत में ही शहर जलमग्न हो गया है तो आगे आने वाले महीनों में क्या हालात होंगे, इसकी कल्पना करना कठिन नहीं। अब देखना यह है कि नगर प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाता है या एक बार फिर बरसात के नाम पर सिर्फ "जवाबदेही" की बारिश करता रहेगा।