नेशनल डेस्क , रानी कुमारी।
नई दिल्ली। स्वस्थ शरीर और बेहतर जीवन के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर वर्ष 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान लोगों को सही पोषण, संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ रहने के लिए भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, फाइबर और पर्याप्त पानी का संतुलित मात्रा में होना आवश्यक है। केवल पेट भरना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि शरीर की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का सेवन भी जरूरी होता है।
संतुलित थाली में अनाज के साथ दाल, हरी सब्जियां, फल और दूध या दूध से बने खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर और अंडा प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। वहीं हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल शरीर को जरूरी विटामिन, खनिज और फाइबर उपलब्ध कराते हैं। भोजन में बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज को शामिल करना भी बेहतर माना जाता है। मौसम के अनुसार अलग-अलग रंगों और प्रकार के फल-सब्जियों का सेवन करने से आहार में पोषक तत्वों की विविधता बढ़ती है।
स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए जंक फूड, अधिक चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए। पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे पेय पदार्थों की जगह घर का ताजा और पौष्टिक भोजन बेहतर विकल्प है। इसके साथ ही शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना भी जरूरी है। बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि पर्याप्त पोषक तत्व उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना है कि स्वस्थ जीवन की शुरुआत हमारी रोजमर्रा की थाली से होती है। संतुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद जरूरी होता हैं। स्वस्थ रहने के लिए महंगे खाद्य पदार्थों की जरूरत नहीं, बल्कि स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों को सही मात्रा और संतुलन के साथ भोजन में शामिल करना अधिक महत्वपूर्ण है। सही पोषण अपनाकर कुपोषण के साथ-साथ कई जीवनशैली संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।







