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राष्ट्रीय राजधानी में हुआ जनजातीय समुदायों का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम

नेशनल डेस्क , रानी कुमारी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में रविवार को जनजातीय समुदायों का अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समागम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों जनजातीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपनी संस्कृति, परंपराओं तथा सामाजिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और जनसभा को संबोधित किया। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस समागम का हिस्सा बने।

आयोजकों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस भव्य आयोजन में लगभग 1.5 लाख से अधिक लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई। यह दिल्ली में आयोजित जनजातीय समुदायों का अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम माना जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना था।

कार्यक्रम के अंतर्गत राजधानी के पांच अलग-अलग स्थानों से विशाल शोभायात्राओं का आयोजन किया गया, जो दोपहर बाद लाल किला परिसर में आकर एकत्रित हुईं। शोभायात्राओं में पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, लोकगीत, वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति और विभिन्न जनजातीय संस्कृतियों की झलक देखने को मिली। इस दौरान प्रतिभागियों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का संदेश भी दिया।

समागम में विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने कहा कि जनजातीय समाज की परंपराएं और जीवन मूल्य भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

आयोजन स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम के समापन पर जनजातीय समुदायों ने सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दोहराया।