विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ डीजल आयात से जुड़े समझौते का बचाव करते हुए इसे अमेरिकी नागरिकों के हित में लिया गया फैसला बताया है। इस समझौते को लेकर ट्रंप को अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों के विरोध का सामना करना पड़ा है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी इस कदम पर आपत्ति जताई है। दोनों दलों के सांसदों का कहना है कि रूस से तेल का आयात अमेरिकी कानून का उल्लंघन है, क्योंकि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के तहत इस तरह के आयात पर रोक है। उनका तर्क है कि जब तक रूस यूक्रेन के खिलाफ अपना सैन्य अभियान बंद नहीं करता, तब तक रूसी तेल का आयात प्रतिबंधित और गैरकानूनी बना रहेगा।
रूस के साथ डीजल से जुड़ा समझौता सामने आने के बाद ट्रंप की नीतियों और उनके फैसले को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस मुद्दे पर विरोध केवल विपक्षी दल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के सांसदों ने भी इस कदम पर सवाल उठाए हैं। सांसदों का कहना है कि रूस से तेल आयात करने की अनुमति देना उन प्रतिबंधों के उद्देश्य के विपरीत है, जो यूक्रेन के खिलाफ रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण लगाए गए हैं। इस मामले में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने रूसी तेल के आयात को अमेरिकी कानून और प्रतिबंधों के संदर्भ में उठाया है।
हालांकि, ट्रंप ने आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रूस से आयात की अनुमति दी है। उनके अनुसार, ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर अमेरिकी नागरिकों पर पड़ता है और इसे कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ट्रंप ने संकेत दिया कि तेल की ऊंची कीमतों के कारण उनकी पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता था। ऐसे में उन्होंने कीमतों को काबू में रखने के लिए यह निर्णय लिया। उनका तर्क है कि अमेरिकी नागरिकों को राहत देना इस फैसले के पीछे प्रमुख वजह रही है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में तीन नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों को देखते हुए ईंधन की कीमतों और महंगाई का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप ने अपने बचाव में कहा कि तेल की ऊंची कीमतों के कारण रिपब्लिकन पार्टी के सामने चुनौती खड़ी हो सकती थी। ऐसे में उनकी सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाया। हालांकि, रूस से तेल आयात को लेकर उठे सवालों ने इस फैसले को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने अमेरिकी नागरिकों के लिए सही विकल्प चुना है और उनके लिए अमेरिका के हित हमेशा सर्वोपरि रहेंगे। उनके इस बयान का उद्देश्य रूस से डीजल आयात के फैसले को अमेरिकी जनता के हितों से जोड़कर उसका बचाव करना था। ट्रंप ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका निर्णय देश के नागरिकों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
इस तरह रूस से डीजल आयात का मुद्दा अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर ट्रंप तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने फैसले को जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों प्रमुख दलों के सांसदों ने रूसी तेल के आयात को प्रतिबंधों और अमेरिकी कानून के उल्लंघन से जोड़कर सवाल उठाए हैं। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने अमेरिकी नागरिकों के हित में फैसला लिया है, जबकि आलोचकों का रुख है कि यूक्रेन के खिलाफ रूस का सैन्य अभियान जारी रहने तक रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लागू रहना चाहिए।







