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लोक अदालत को लेकर अधिवक्ताओं के साथ बड़ी बैठक

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

न्यायिक प्रशासन ने भरोसा दिया ई-फाइलिंग प्रणाली से अधिवक्ताओं के हितों पर कोई नहीं आएगी आंच, कार्यप्रणाली में बढ़ेगी पारदर्शिता।

पूर्वी चंपारण: मोतिहारी के बार एसोसिएशन स्थित कैफी हॉल में शनिवार, 21 फरवरी 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकार और अधिवक्ता संघ के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक का केंद्र बिंदु आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत और "राष्ट्र के नाम मध्यस्थता कार्यक्रम 2.0" की सफलता के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना था। बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि न्यायिक प्रणाली में लोक अदालत और मध्यस्थता ऐसे सशक्त माध्यम हैं, जिनसे न केवल अदालतों का बोझ कम होता है, बल्कि आम जनता को भी बिना किसी कड़वाहट के त्वरित न्याय मिलता है।

न्यायिक सुलभता और ई-फाइलिंग पर चर्चा

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभिषेक कुमार दास ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय प्रक्रिया को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए लोक अदालत एक बेहतरीन विकल्प है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे अपने पक्षकारों को आपसी समझौते के लाभ समझाएं और उन्हें इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। आधुनिक तकनीक के समावेश पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ई-फाइलिंग प्रणाली का उद्देश्य कार्यप्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने अधिवक्ताओं की शंकाओं को दूर करते हुए आश्वस्त किया कि यह नई व्यवस्था अधिवक्ताओं के हितों या उनकी आय को किसी भी रूप में प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि इससे काम में सुगमता आएगी।

अधिवक्ताओं की समस्याएँ और प्रशासनिक आश्वासन

बैठक के दौरान जिला अधिवक्ता संघ के महासचिव राजीव कुमार द्विवेदी ने अधिवक्ताओं को पेश आ रही व्यावहारिक चुनौतियों और न्यायालय परिसर की अव्यवस्थाओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और अधिवक्ताओं की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी सुविधाओं की मांग की। इसी क्रम में संघ के अध्यक्ष शेषनाथ कुंवर ने मुकदमों की नकल (सर्टिफाइड कॉपी) प्राप्त करने में होने वाली देरी का मुद्दा उठाया। इस पर न्यायालय प्रशासन की ओर से त्वरित संज्ञान लेते हुए भरोसा दिया गया कि नकल प्रक्रिया को जल्द ही व्यवस्थित और तेज किया जाएगा ताकि वकीलों का समय बर्बाद न हो।

मध्यस्थता 2.0: विवादों का स्थायी समाधान

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव नितिन त्रिपाठी ने "राष्ट्र के नाम मध्यस्थता कार्यक्रम 2.0" की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता के जरिए होने वाले फैसले दोनों पक्षों के बीच स्थायी सौहार्द कायम करते हैं। सचिव ने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक लंबित मामलों को चिन्हित करें और उन्हें लोक अदालत के लिए अग्रसारित करें। बैठक में एडीजे सुरेंद्र प्रसाद, मुकुंद कुमार, ब्रजेश कुमार, राहुल कुमार और हरेश्वर प्रसाद सहित बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे।