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विनेश फोगाट मामले में WFI को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की टिप्पणियां हटाने से किया इनकार

नेशनल डेस्क - वेरॉनिका राय

नई दिल्ली । विनेश फोगाट से जुड़े मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को उच्चतम न्यायालय से राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों को हटाने से इनकार कर दिया, जिनमें डब्ल्यूएफआई की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने गुरुवार को कहा कि इस मामले में डब्ल्यूएफआई की याचिका अब महत्वहीन हो चुकी है। अदालत ने कहा कि विनेश फोगाट ने 29 मई को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चयन ट्रायल में हिस्सा ले लिया था, इसलिए इस विवाद का मूल मुद्दा अब समाप्त हो चुका है।

डब्ल्यूएफआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली उच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी, जिनमें महासंघ की आलोचना की गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के निपटारे का मतलब यह नहीं है कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय के सभी निष्कर्षों और टिप्पणियों से सहमत है। अदालत ने कहा कि याचिका का निपटारा केवल परिस्थितियों को देखते हुए किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने विनेश फोगाट को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को लेकर डब्ल्यूएफआई की कड़ी आलोचना की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि महासंघ की यह कार्रवाई उचित नहीं लगती और इसे बदले की भावना से उठाया गया कदम माना जा सकता है।

विनेश फोगाट और डब्ल्यूएफआई के बीच यह विवाद लंबे समय से चर्चा में रहा है। मामले में चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के अधिकारों को लेकर कई सवाल उठे थे। इसी क्रम में अदालतों में भी सुनवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणियां रिकॉर्ड में बनी रहेंगी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उसकी ओर से इन टिप्पणियों का समर्थन नहीं माना जाना चाहिए।

इस फैसले को डब्ल्यूएफआई के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने का रास्ता पहले ही साफ हो चुका है। अब इस मामले में कानूनी विवाद लगभग समाप्त माना जा रहा है।