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व्यावसायिक हिंदी सिनेमा को नई पहचान देने वाले निर्माता पहलाज निहलानी को फिल्म जगत ने किया याद

एंटरटेनमेंट डेस्क, अर्पिता कृष्णा

हिंदी फिल्म उद्योग के दिग्गज निर्माता, वितरक और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी को व्यावसायिक हिंदी सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए याद किया जा रहा है। चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्माण किया और मुख्यधारा के मनोरंजक सिनेमा को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। 

10 जनवरी 1950 को कराची में जन्मे पहलाज निहलानी का परिवार देश विभाजन के बाद भारत आकर मुंबई में बस गया। उन्होंने 1982 में फिल्म ‘हाथकड़ी’ से निर्माता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद ‘आंधी-तूफान’, ‘इल्जाम’, ‘आग ही आग’, ‘गुनाहों का फैसला’, ‘पाप की दुनिया’, ‘मिट्टी और सोना’, ‘शोला और शबनम’ और ‘आंखें’ जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्माण किया। 

पहलाज निहलानी को अभिनेता गोविंदा को बड़ा अवसर देने का श्रेय भी दिया जाता है। उनकी फिल्म ‘इल्जाम’ ने गोविंदा के करियर को नई दिशा दी, जबकि बाद में दोनों की जोड़ी ने कई सफल फिल्में दीं। उन्होंने अभिनेता चंकी पांडे को भी हिंदी सिनेमा में महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। 

फिल्म निर्माण के अलावा निहलानी ने 2015 से 2017 तक सीबीएफसी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। इस दौरान फिल्म प्रमाणन और सेंसरशिप से जुड़े उनके कई फैसले चर्चा का विषय बने। 

4 जून 2026 को 76 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद फिल्म उद्योग के कई कलाकारों और फिल्मकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को याद किया। 

पहलाज निहलानी का नाम उन निर्माताओं में शामिल किया जाता है जिन्होंने मनोरंजन प्रधान हिंदी फिल्मों को नई पहचान दी और 1980 तथा 1990 के दशक में व्यावसायिक सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।