Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

शारदीय नवरात्र आस्था के संग प्रेम, सद्भाव का संकल्प

लोकल डेस्क, आकाश अस्थाना।

मां दुर्गा की आराधना से जगाएं सद्भाव की ज्योति, समाज में फैलाएं एकता और मानवता का संदेश

रक्सौल: शारदीय नवरात्र केवल मां दुर्गा की उपासना और शक्ति की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि यह आत्मशुद्धि, सकारात्मकता, नारी सम्मान और समाज में प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारे को मजबूत करने का अवसर भी है। मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें साहस, करुणा, धैर्य और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे समय में, जब देश का सामाजिक वातावरण कई चुनौतियों से गुजर रहा है और छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव तथा मतभेद सामने आते हैं, तब नवरात्र का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि त्योहारों की रोशनी केवल घरों और मंदिरों तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे विचारों, व्यवहार और आपसी संबंधों में भी उजाला फैलाए। धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र की विविधताओं के बावजूद भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता और सांस्कृतिक समरसता है। इस ताकत को बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

नवरात्र की विशेषता यह है कि मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। देश के विभिन्न समुदायों के लोग इस पर्व की रौनक, सांस्कृतिक परंपराओं और उत्सवी वातावरण से जुड़ते हैं। कहीं दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजते हैं, कहीं भक्ति संगीत गूंजता है, तो कहीं डांडिया और गरबा की धूम लोगों को एक साथ जोड़ती है। रंग-बिरंगे परिधानों, तालबद्ध कदमों और उल्लास से भरे इन आयोजनों में सामाजिक मेलजोल और सामूहिक आनंद की सुंदर झलक दिखाई देती है।

लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने कल से शुरू शारदीय नवरात्र की सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

डांडिया और गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि हमारी जीवंत सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। इन आयोजनों में अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साथ भाग लेते हैं और खुशियां साझा करते हैं। यही उत्सव की असली खूबसूरती है—जहां भेदभाव की दीवारें कमजोर पड़ें और आपसी विश्वास के रिश्ते मजबूत हों।

हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में यह भी जरूरी है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान संयम, मर्यादा और आपसी सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाए। अफवाहों, भड़काऊ संदेशों और नफरत फैलाने वाली बातों से दूर रहकर शांति तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सभी नागरिक सहयोग करें। किसी भी धर्म या समुदाय के प्रति अपमानजनक व्यवहार हमारी साझा संस्कृति और मानवीय मूल्यों के विरुद्ध है।

नवरात्र हमें यह भी सिखाता है कि शक्ति का अर्थ केवल सामर्थ्य नहीं, बल्कि कमजोर की रक्षा करना, अन्याय का विरोध करना और जरूरतमंद की सहायता करना भी है। यदि हम मां दुर्गा की पूजा करते हैं, तो हमें महिलाओं के सम्मान, बेटियों की सुरक्षा और समाज में व्याप्त बुराइयों के उन्मूलन का संकल्प भी लेना चाहिए। सच्ची आराधना तभी सार्थक होगी, जब हमारे आचरण में भी करुणा, संवेदनशीलता और नैतिकता दिखाई दे।

आइए, इस शारदीय नवरात्र पर हम संकल्प लें कि अपने मतभेदों को मनभेद नहीं बनने देंगे, धर्म को विभाजन का नहीं, बल्कि सद्भाव का माध्यम बनाएंगे और हर व्यक्ति के विश्वास का सम्मान करेंगे। हमारी पूजा में श्रद्धा हो, उत्सव में उल्लास हो और व्यवहार में मानवता हो।

मां दुर्गा से यही प्रार्थना है कि उनका आशीर्वाद देश के हर नागरिक पर बना रहे, समाज से भय और वैमनस्य दूर हो तथा प्रेम, शांति, समृद्धि और भाईचारे का वातावरण मजबूत हो।

क्योंकि नवरात्र की सच्ची विजय केवल बुराई पर अच्छाई की जीत नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर की नफरत पर प्रेम, अहंकार पर विनम्रता और विभाजन पर एकता की विजय भी है।