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शास्त्रीय संगीत सनातन की अनमोल देन: ई.राजीव कुमार

लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।

विश्वस्तरीय कलाकारों और सीखने वालों को एक मंच पर लाने के लिए 'कलासुधा अकादेमी' की शुरुआत, विभिन्न देशों में आयोजित होंगे विशेष वर्कशॉप।

पूर्वी चंपारण: चंपारण की मिट्टी से निकलकर सात समंदर पार भारतीय संस्कृति का परचम लहराने वाले 'कलासुधा' के निदेशक ई. राजीव कुमार को 'प्रसाद रत्नेश्वर संस्कृति प्रतिष्ठान' द्वारा सम्मानित किया गया। पेशे से आईटी इंजीनियर और लंदन में बिहार महोत्सव के संयोजक राजीव कुमार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सम्मान समारोह के दौरान बिहार सरकार से राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त वरिष्ठ रंगकर्मी एवं साहित्यकार प्रसाद रत्नेश्वर ने कहा कि मोतिहारी में जन्मे राजीव कुमार ने एक सफल आयोजक के रूप में वैश्विक मंचों पर भारतीय कला को नई पहचान दी है। उन्होंने पूरे भारत के ख्यातिलब्ध कलाकारों को लंदन आमंत्रित कर भारतीय गौरव को बढ़ाया है।

अपनी मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए राजीव कुमार ने कहा, "भारतीय शास्त्रीय संगीत सनातन संस्कृति की एक अनुपम देन है। जब भी मैं शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों का आयोजन करता हूँ, तो मुझे अपनी मिट्टी से जुड़ाव महसूस होता है। विदेशी धरती पर रहकर कला की सेवा करना मेरे लिए भारत भूमि के ऋण को चुकाने जैसा है।" उन्होंने आगे बताया कि 'कलासुधा' का उद्देश्य अब केवल विदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद जैसे महानगरों में भी वैश्विक स्तर के शास्त्रीय गायकों और वादकों के प्रदर्शन की तैयारी चल रही है।

'कलासुधा अकादेमी' से जुड़ेंगे विश्वभर के कलाकार

राजीव कुमार ने बताया कि इस वर्ष 'कलासुधा अकादेमी' की शुरुआत की गई है, जो विश्व स्तर पर बेहतरीन कलाकारों और संगीत प्रेमियों के बीच एक सेतु का काम करेगी। इसके अंतर्गत दुनिया के अलग-अलग देशों में वर्कशॉप आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए वे वर्तमान भारत यात्रा के दौरान कई दिग्गज संगीतज्ञों से संपर्क कर रहे हैं।

बिहार के सांस्कृतिक विकास के लिए उठाया कदम

राजीव कुमार ने बिहार की कला और संस्कृति के उत्थान के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने हेतु वे इसी माह की 15 तारीख को संबंधित अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उनका लक्ष्य बिहार की पारंपरिक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक आधुनिक और भव्य मंच प्रदान करना है।