नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
- शेहजाद पूनवाला बोले- कुछ व्यक्तियों के दबाव में फैसला, पीएम मोदी का समर्थन जारी
नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शेहजाद पूनवाला ने पार्टी और उसकी सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन को पत्र लिखकर कहा कि कुछ व्यक्तियों के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
पूनवाला ने पत्र में लिखा कि वे 30 जुलाई के अपने पिछले पत्र के क्रम में यह पत्र पढ़ें, जिसमें उन्होंने आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से बिना शर्त इस्तीफा देने की पेशकश की थी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने, जिनके बारे में उन्होंने विस्तार से बताया था, उन्हें अपने पहले के फैसले पर अडिग रहने को मजबूर कर दिया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के प्रति कृतज्ञता, स्नेह और सम्मान जताया। पूनवाला ने कहा कि वे बिना किसी ठेस के और केवल आभार के साथ पार्टी को पिछले पांच वर्षों में दिए गए मंच और अवसरों के लिए धन्यवाद देते हैं।
एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा कि किसी अन्य देश या पार्टी में उनकी तरह की कहानी संभव नहीं होती। वे युवा, पसमांदा मुस्लिम और गैर-राजवंशीय पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने पार्टी से कहा कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए।
पूनवाला ने कहा कि पार्टी ने उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार नहीं किया और पुनर्विचार करने को कहा, जो उन्हें अत्यंत स्पर्श करने वाला लगा। लंबी सोच-विचार के बाद उन्होंने राष्ट्रीय प्रवक्ता और सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से मुक्त होने का अंतिम फैसला लिया।
वे 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे। उससे पहले कांग्रेस से जुड़े रहे। 2008 में कांग्रेस के लिए काम शुरू किया। कानून की पढ़ाई के बाद सुरेश कलमाड़ी के यहां इंटर्नशिप की और एआईसीसी में स्वयंसेवक बने। 2017 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव प्रक्रिया को राहुल गांधी के पक्ष में पक्षपातपूर्ण बताया था, जिसके बाद पार्टी छोड़ दी। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके आरोपों का इस्तेमाल कांग्रेस पर हमला करने में किया था।
पुणे के संपन्न आगा खान मुस्लिम परिवार से आने वाले पूनवाला राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनवाला के भाई हैं। दोनों के बीच सार्वजनिक रूप से दूरी बन गई थी जब शेहजाद ने कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की।
उन्होंने बताया कि फैसला अत्यावश्यक आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण लिया गया है। वे निजी क्षेत्र में जाने का मन बना चुके हैं। फिर भी जहां संभव होगा और जिस भी रूप में संभव होगा, वे प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के विजन व काम का समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “मैं व्यवस्था छोड़ रहा हूं, व्यक्ति या विचार नहीं।”







