लोकल डेस्क, अभिलाष गुप्ता।
वीरगंज: ऐतिहासिक शक्तिपीठ श्री गहवा माई मंदिर के पुनर्निर्माण के 14वें वर्ष तथा श्री गहवा माई रथमाला के चौथे वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाली भव्य रथयात्रा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास बिकने वाले लड्डू, पेड़ा तथा अन्य प्रसाद संबंधी मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।
आगामी 2083 साल आषाढ़ 32 गते सुबह 8 बजे से विशेष पूजा, हवन तथा शाम 6:30 बजे से प्रसाद वितरण कार्यक्रम आयोजित होने वाला है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए मंदिर के आसपास बिकने वाले प्रसाद संबंधी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच और बाजार निगरानी को प्रभावी बनाने की मांग की गई है।
उपभोक्ता हित संरक्षण मंच नेपाल के केंद्रीय उपाध्यक्ष अजय अधिकारी ने बताया कि बाजार में प्रति किलो 180 रुपये तक के सस्ते लड्डू और अन्य मिठाइयां बड़ी मात्रा में बिक्री के लिए लाई जा रही हैं, लेकिन उनकी निर्माण तिथि, उपयोग किए गए कच्चे पदार्थ, गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों की प्रभावी जांच नहीं हो रही है।
उनके अनुसार धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों में भगवान को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद ही यदि घटिया या अखाद्य हो, तो इससे हजारों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “यदि प्रसाद के रूप में वितरित किए गए घटिया लड्डू, पेड़ा या मिठाई खाने से श्रद्धालु बीमार पड़ते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” उन्होंने संबंधित निकायों से समय रहते सतर्क होने का आग्रह किया।
अधिकारी ने खाद्य प्रौद्योगिकी तथा गुणवत्ता नियंत्रण डिवीजन कार्यालय पर्सा, माईस्थान संचालन समिति, श्री गहवा माई तीर्थ विकास समिति तथा स्थानीय प्रशासन से संयुक्त रूप से बाजार निरीक्षण कर घटिया खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने की मांग की है।
उन्होंने धर्म और आस्था के नाम पर अखाद्य एवं घटिया मिठाइयां बेचने वाले व्यवसायियों पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2075 तथा प्रचलित खाद्य कानून के अनुसार जुर्माना और कानूनी कार्रवाई किए जाने की भी मांग की।
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि धार्मिक पर्व, मेला और रथयात्रा जैसे अवसरों पर खाद्य सामग्री की नियमित जांच, नमूना परीक्षण तथा मानकों के विपरीत कार्य करने वाले व्यवसायियों पर कड़ी कार्रवाई होने पर ही उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने कहा, “बीमारी होने के बाद इलाज खोजने से बेहतर है कि बीमारी को रोकने के लिए समय रहते सचेत और सजग रहा जाए।” इसी के साथ उन्होंने संबंधित निकायों, व्यवसायियों और उपभोक्ताओं से खाद्य सुरक्षा के विषय में विशेष सतर्कता बरतने का आग्रह किया।







