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संबंधों का निर्धारण व्यवहार से: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: प्रकृति (ईश्वर) का काम हमें आपस में मिलाना होता है,लेकिन संबंधों की दूरियों या नजदीकियों का निर्धारण हमारा व्यवहार करता है।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। जब सुधार-प्रयासों की शक्ति बढ़ती है और लगता है कि वे सफलता की दिशा में चल रहे हैं तो विरोध खड़ा किया जाता है।चुनौतियां मिलती हैं। शास्त्रार्थ खड़े किए जाते हैं।अच्छी चीजें उन्हें मिलती है जो प्रतीक्षा करते हैं। बेहतर चीजें उन्हें मिलती है जो प्रयत्न करते हैं, लेकिन सर्वोत्तम चीजें उन्हें मिलती है जो अपने प्रयत्नों पर विश्वास करते हैं। कहने से कठिन सुनना और सुनने से कठिन सहना होता है पर सबसे कठिन होता है, सब भूल जाना और सामान्य रहना।

सोने में जब हीरा जड़ कर आभूषण बनाया जाता है,वह आभूषण फिर सोने का नहीं हीरे का कहलाता है, इसी प्रकार "काया" इंसान की सोना है और "कर्म" हीरा कहलाता है। कर्मो के निखार से काया का मूल्य बढ़ जाता है। श्रीकृष्ण कहते हैं, ज्ञात रहे पार्थ, अत्यधिक चिंता भविष्य नहीं बदलती पर वर्तमान ज़रूर बिगाड़ देती है। मन को शांत रखें, समाधान स्पष्ट दिखेगा। अगर हम अपनी काबिलियत पर शक करने के बजाय यकीन करने लगे तो उंगलियां उठाने वाले भी तालियां बजाना शुरू कर देंगें। हमें अच्छा जीवन या बुरा जीवन नहीं दिया जाता है, हमें एक जीवन दिया जाता है, इसे अच्छा या बुरा बनाना हम पर निर्भर करता है।

इस जीवन का एकत्रित धन अगले जन्म में काम नहीं आएगा किन्तु, इस जीवन का एकत्रित "पुण्य" जन्मों-जन्म तक काम आएगा। इसलिए "धन" के साथ "पुण्य" भी कमाइए और उसे भी एकत्रित कीजिए। शब्द ब्रह्म है, शब्दों का उपयोग बहुत विचार कर करें।बोलने से पहले शब्द मनुष्य के अधीन होते हैं, लेकिन बोलने के बाद मनुष्य अपने शब्दों के अधीन हो जाता है। भावनाओं को समझने वाला अनपढ़ इन्सान भी दुनिया का सबसे ज्ञानी व्यक्ति होता है। आप आस्तिक रहें या नास्तिक रहें, पर उससे ज्यादा जरूरी है आप जीवन में वास्तविक रहें !