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संस्कृत सप्ताह विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति जागृत करेगा नई चेतना: कुलपति

स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना।

योग विज्ञान पर विशेष व्याख्यान में विद्यार्थियों को मिली भारतीय ज्ञान-परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि।

नई दिल्ली: श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में छात्र कल्याण पीठ एवं संस्कृत भारती संगठन के संयुक्त तत्त्वावधान में 24 से 31 अगस्त 2026 तक संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा, साहित्य, भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं संस्कृति के विविध आयामों को विद्यार्थियों से जोड़ने के उद्देश्य से सप्ताहभर विभिन्न शैक्षणिक, बौद्धिक, साहित्यिक, रचनात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा, दर्शन, साहित्य, संस्कृति और वैज्ञानिक चिंतन की सशक्त संवाहिका है।

संस्कृत सप्ताह जैसे आयोजन विद्यार्थियों को भाषा के अध्ययन से आगे बढ़कर उसकी व्यापक सांस्कृतिक एवं ज्ञानात्मक भूमिका से परिचित कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति गहन आत्मीयता, गौरवबोध और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने के साथ उनकी प्रतिभा को अभिव्यक्ति का सशक्त मंच प्रदान करते हैं।

कुलपति प्रो. पाठक ने कहा कि वाद-विवाद, निबंधलेखन, भाषण, श्लोकान्त्याक्षरी, गीतगायन, नृत्य एवं चित्रकला जैसी प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा को निखारने में सहायक होंगी। वहीं विशेष व्याख्यान, छात्रसंगोष्ठी एवं समूह परिचर्चाएँ विद्यार्थियों को संस्कृत तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा के समसामयिक महत्त्व को समझने का अवसर प्रदान करेंगी। उन्होंने संस्कृत सप्ताह के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि संस्कृत सप्ताह विश्वविद्यालय की अकादमिक गतिविधियों को भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण अवसर है।

संस्कृत का संरक्षण एवं संवर्धन केवल उसके अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके विशाल ज्ञान-साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाना और उसके ज्ञानात्मक एवं सांस्कृतिक पक्ष को समकालीन जीवन से जोड़ना भी हमारा दायित्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संस्कृत सप्ताह के विविध कार्यक्रम विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान-परंपरा के प्रति उनकी दृष्टि को और अधिक व्यापक बनाएँगे। संस्कृत सप्ताह के प्रथम दिवस विश्वविद्यालय में योग विज्ञान पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें प्रो. महेश प्रसाद सिलोड़ी ने योग के शास्त्रीय, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि योग भारतीय ज्ञान-परंपरा की ऐसी समग्र जीवन-पद्धति है, जो मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक संतुलन को भी सुदृढ़ करती है। वर्तमान जीवनशैली में बढ़ते तनाव और असंतुलन के बीच योग की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने विद्यार्थियों को योग को केवल शारीरिक अभ्यास के रूप में न देखकर भारतीय दर्शन, जीवन-मूल्यों और आत्मानुशासन से जुड़ी व्यापक परंपरा के रूप में समझने का आह्वान किया। कार्यक्रम में छात्र कल्याण पीठ की अधिष्ठाता प्रो. सुजाता त्रिपाठी, दर्शन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. अनेकांत कुमार जैन, योग विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. विष्णुपद महापात्र, प्रो. मार्कण्डेय नाथ तिवारी, डॉ. रमेश कुमार, डॉ. हरिराम मीना, डॉ. विजय गुसाईं, डॉ. नवदीप जोशी एवं डॉ. हर्ष शुक्ला सहित विश्वविद्यालय के अनेक संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

सप्ताहभर होंगे विविध कार्यक्रम

24 अगस्त को योग विज्ञान पर विशेष व्याख्यान प्रो. महेश प्रसाद सिलोड़ी के संयोजन में हुआ। इसी दिन डॉ. श्वेता यादव एवं डॉ. हिमांशी शर्मा के संयोजन में ‘संस्कृति : भारतीय ज्ञान-परंपरा’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता, डॉ. मुकेश कुमार के संयोजन में निबंधलेखन प्रतियोगिता, डॉ. धर्मपाल प्रजापत के संयोजन में श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता तथा डॉ. विनय गोपाल त्रिपाठी के संयोजन में ‘संस्कृत कृतिमबुद्धिमत्ता वरदानम् अथवा अभिशापः’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई।

25 अगस्त को वेद-वेदांग पीठ का विशेष व्याख्यान डॉ. हिमांशु शेखर त्रिपाठी, छात्रसंगोष्ठी डॉ. अर्चना कुमारी, पुराण पीठ का विशेष व्याख्यान डॉ. सीमा, समूह परिचर्चा डॉ. पुष्कर पराग देवपूजारी तथा कटवारिया ग्राम में शोभायात्रा डॉ. अर्चना कुमारी, डॉ. मीनाक्षी मिश्रा एवं डॉ. मोहनलाल के संयोजन में आयोजित होगी।

26 अगस्त को किशनगढ़ ग्राम एवं मुनिरका मेट्रो स्थान पर संस्कृत प्रचार अभियान का आयोजन डॉ. मोहनलाल के संयोजन में किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य संस्कृत भाषा के प्रति जनसामान्य में जागरूकता एवं रुचि का विस्तार करना है। 27 अगस्त को दर्शन पीठ का विशेष व्याख्यान डॉ. पुष्कर पराग देवपूजारी, भाषण प्रतियोगिता डॉ. विकास चौधरी, श्लोकान्त्याक्षरी श्री नरेश, साहित्य-संस्कृति पीठ का विशेष व्याख्यान डॉ. अनमोल शर्मा तथा प्रश्नमंच डॉ. धर्मपाल प्रजापत के संयोजन में आयोजित किया जाएगा।

31 अगस्त को आधुनिक विषय पीठ का विशेष व्याख्यान श्री आदित्य पंचोली, संस्कृत गीतगायन प्रतियोगिता डॉ. अनमोल शर्मा, संस्कृत नृत्य प्रतियोगिता श्रीमती वंदना शुक्ला एवं डॉ. प्रियंका मिश्रा तथा शिक्षा पीठ का विशेष व्याख्यान डॉ. आरती शर्मा के संयोजन में आयोजित होगा। समापन अवसर पर डॉ. परमेश शर्मा के संयोजन में समूह परिचर्चा तथा संस्कृत संभाषण शिविरों का उद्घाटन किया जाएगा।

कार्यक्रम के समग्र एवं सुचारु आयोजन के लिए छात्र कल्याण पीठ की अधिष्ठाता प्रो. सुजाता त्रिपाठी के मार्गदर्शन में सहायक पीठाध्यक्ष डॉ. दिनेश यादव को संयोजक तथा डॉ. परमेश कुमार शर्मा एवं डॉ. आरती शर्मा को सह-संयोजक का दायित्व सौंपा गया है।

संस्कृत सप्ताह विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा को केवल अध्ययन-विषय के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, दर्शन, साहित्य, संस्कृति और जीवन-मूल्यों की जीवंत परंपरा के रूप में समझने का अवसर प्रदान कर रहा है। विश्वविद्यालय परिवार की व्यापक सहभागिता से आयोजित यह सप्ताह विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि, भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति गौरवबोध तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है।