स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना ।
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एनएफसीएसएफ बना रहा है सकरी और रैयाम में सहकारी चीनी मिलों के लिए डीपीआर
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इन चीनी मिलों की स्थापना के लिए सहकारिता विभाग और राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के बीच हो चुका है एमओयू
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सात निश्चय-3 "समृद्ध उद्योग- सशक्त बिहार" के अंतर्गत यहां हो रही है सहकारी चीनी मिल की स्थापना
पटना। मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में अब जल्द सहकारी चीनी मिल खुलेगी। मिल की स्थापना के लिए सहकारिता विभाग तेजी से आवश्यक कदम उठा रहा है। विभाग ने इसके लिए बीते 23 फरवरी को पटना में राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) नई दिल्ली के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। इसके बाद एनएफसीएसएफ टीम मधुबनी और दरभंगा जाकर क्षेत्र अध्ययन कर रही है।
बुधवार 25 फरवरी को एनएफसीएसएफ के मुख्य गन्ना सलाहकार डॉ आर बी डोले एवं तकनीकी सलाहकार के एम चौधरी ने सकरी में प्रस्तावित सहकारी चीनी मिल के संभाव्यता प्रतिवेदन एवं डीपीआर तैयार करने के लिए सकरी चीनी मिल का स्थल निरीक्षण कर स्थानीय किसानों से बातचीत की है | इस दौरान जिला सहकारिता पदाधिकारी एवं जिला ईख पदाधिकारी भी मौजूद थे। वहीं मंगलवार, 24 फरवरी को ही रैयाम (दरभंगा) में एनएफसीएसएफ की टीम ने कार्य प्रारंभ कर दिया था।
एनएफसीएसएफ पहले चरण में संभाव्यता प्रतिवेदन तैयार कर सहकारिता विभाग को सौंपेगी। जिसकी मंजूरी के बाद चीनी मिल की स्थापना के लिए डीपीआर तैयार कर दिया जाएगा। डीपीआर की मंजूरी के बाद कार्यान्वयन एजेंसी निर्धारित कर शीघ्र कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद अब एनएफसीएसएफ टीम दरभंगा एवं मधुबनी जाकर क्षेत्र अध्ययन कर रही है।
पावर जेनरेशन, इथेनॉल और सीबीजी का भी होगा उत्पादन
सकरी एवं रैयाम में गन्ना कॉम्पलेक्स का निर्माण प्रस्तावित है जिसमें चीनी उत्पादन के साथ-साथ पावर जेनरेशन, इथेनॉल उत्पादन तथा कॉम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) उत्पादन भी शामिल है। बंद पड़ी सकरी चीनी मिल में 30.848 एकड़ तथा रैयाम चीनी मिल में 68.176 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जिसे सहकारिता विभाग को हस्तांतरित करने की कार्रवाई चल रही है।
एनएफसीएसएफ, नई दिल्ली के अनुभव का होगा लाभ
एनएफसीएसएफ को अन्य परामर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की भी जिम्मेवारी सौपी गई है। देश के विभिन्न राज्यों में चीनी मिल की स्थापना, पुनरुद्धार में एनएफसीएसएफ नई दिल्ली को काफी अनुभव प्राप्त है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसके तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से बिहार में आधुनिक तकनीक से लैस सहकारी चीनी मिलों की स्थापना होगी। इससे राज्य के उद्योग में समृद्धि होगी और एक बड़ी आबादी को रोजगार मिलेगा।







