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समाजसेवी महेश्वर बाबू के निधन से चंपारण ने खोया ‘गरीबों का मसीहा’

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

शिक्षा की अलख जगाने और सामाजिक समरसता के प्रतीक थे 85 वर्षीय महेश्वर प्रसाद सिंह; क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

पूर्वी चंपारण: मोतिहारी जिले के कुंडवा चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गोरीगांवा के शांत परिवेश में आज उस वक्त मातम पसर गया, जब क्षेत्र के वयोवृद्ध समाजसेवी और संभ्रांत किसान महेश्वर प्रसाद सिंह (85 वर्ष) के निधन की खबर सामने आई। उनके निधन की सूचना मिलते ही न केवल गोरी गांव, बल्कि पूरे पूर्वी चंपारण जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। लोग उन्हें प्यार और सम्मान से 'महेश्वर बाबू' कहकर पुकारते थे।

समाज सेवा और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण

महेश्वर प्रसाद सिंह केवल एक संपन्न किसान ही नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। उस दौर में जब ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की पहुँच सीमित थी, उन्होंने गांव में विद्यालय की स्थापना कर शिक्षा की ज्योति जलाई। उनका मानना था कि समाज की प्रगति का रास्ता स्कूल की सीढ़ियों से होकर गुजरता है।
गरीबों के प्रति उनकी संवेदनशीलता ऐसी थी कि लोग उन्हें 'गरीबों का मसीहा' मानने लगे थे। गांव का कोई भी दरवाजा खटखटाने से पहले लोग महेश्वर बाबू के पास अपनी फरियाद लेकर पहुँचते थे और वे कभी किसी को खाली हाथ नहीं लौटने देते थे।
 

सुख-दुख के साथी और अनुकरणीय व्यक्तित्व

क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि महेश्वर बाबू ने अपना पूरा जीवन लोगों के सुख-दुख बाँटने में समर्पित कर दिया। सामाजिक पंचायतें हों या किसी गरीब बेटी की शादी, उनकी उपस्थिति और सहयोग अनिवार्य माना जाता था। उनका जीवन सादगी और उच्च विचारों का एक जीवंत उदाहरण था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

दिग्गजों ने व्यक्त की गहरी संवेदना

उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित करने और शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। उनके निधन पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों ने गहरा दुख प्रकट किया है

 वरिष्ठ पत्रकार चंद्रभूषण पांडेय ने कहा कि महेश्वर बाबू का जाना एक व्यक्तिगत क्षति है, समाज ने एक सच्चा मार्गदर्शक खो दिया है।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्रोफेसर साकेत रमन ने  संवेदना व्यक्त करते हुए कहां की उनके निधन समाज के लिए बड़ी क्षति है, उनको समाज के लोग सदा याद करेंगे।
 
पूर्व विधायक अवनीश कुमार सिंह ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्य और विद्यालय की स्थापना उन्हें हमेशा जीवित रखेगी।
 पूर्व मुखिया (जिहुली) अजय सिंह और पत्रकार नीरज कुमार ने उनके निधन को चंपारण के सामाजिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।
शोक व्यक्त करने वालों में उनके भतीजे डॉक्टर मनीष कुमार, धीरेंद्र ठाकुर, समाजसेवी नीरज कुमार समेत भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और प्रबुद्ध नागरिक शामिल थे। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की है।
छोड़ गए भरा-पूरा परिवार
महेश्वर प्रसाद सिंह अपने पीछे भरा-पूरा और सुशिक्षित परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिजनों का कहना है कि उनके बताए गए सत्य और सेवा के मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।