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सातवीं सीमा शुल्क सुधार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

लोकल डेस्क, अभिलाष गुप्ता।

  • सेवा सुगमता और डिजिटल प्रणाली विस्तार की मांग।

वीरगंज: वीरगंज स्थित आईसीपी कार्यालय में आयोजित “सातवीं सीमा शुल्क सुधार एवं आधुनिकीकरण रणनीतिक कार्ययोजना (सीआरएमपी)” विषयक अंतरक्रिया कार्यक्रम में सहभागी सरोकारवालों ने सीमा शुल्क सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सेवामुखी बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर जोर दिया।

कार्यक्रम में नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ, मधेश प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष अशोक टेमानी ने कहा कि सीमा शुल्क की भूमिका केवल वस्तुओं की जांच एवं निकासी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यात्री आवागमन को भी सहज और व्यवस्थित बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक यात्री प्रबंधन एवं सुविधा के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।

टेमानी ने व्यापारियों की शिकायतों की सुनवाई तथा समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित और प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, “जब तक व्यापारियों की समस्याओं को सुनने और उनका शीघ्र समाधान करने की व्यवस्था विकसित नहीं होती, तब तक व्यापार सुगमता का लक्ष्य पूरी तरह प्राप्त नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देश के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में अभी भी छोटे सीमा शुल्क कार्यालयों का अभाव है। ऐसे क्षेत्रों में ‘मोबाइल कस्टम सेवा’ शुरू करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट सुविधा से युक्त वाहनों के माध्यम से आवश्यक घोषणा-पत्र और सीमा शुल्क प्रक्रियाएं तत्काल पूरी की जा सकती हैं।

अंतरक्रिया कार्यक्रम में सीमा शुल्क सुधार की विकास यात्रा, सातवें सीआरएमपी की आवश्यकता, योजना निर्माण प्रक्रिया, रणनीतिक संरचना, रूपांतरण के क्षेत्र, कार्ययोजना की संरचना, कार्यान्वयन एवं अनुगमन प्रणाली तथा लागत अनुमान सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम में वीरगंज सीमा शुल्क कार्यालय के प्रमुख, सशस्त्र प्रहरी बल नम्बर 13 गण के गणपति मोहन क्षेत्री, सीमा शुल्क के डीएसपी विकास अधिकारी, वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष हरि गौतम, वरिष्ठ उपाध्यक्ष माधव राजपाल, संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ उद्योगपति अशोक वैद्य सहित विभिन्न सरकारी निकायों, निजी क्षेत्र, कस्टम एजेंटों तथा कर्मचारियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

सहभागियों ने सीमा शुल्क प्रशासन को आधुनिक तकनीक-अनुकूल, व्यवसाय-अनुकूल तथा सेवाग्राही-केंद्रित बनाते हुए व्यापार सुगमता, राजस्व संग्रहण और सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सातवीं सीमा शुल्क सुधार योजना के सफल क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।